मौलाना कमर सुल्तान। स्रोत : आयोजक
हजपुरा। सम्मनपुर क्षेत्र के कटघर कमाल गांव स्थित इमामबाड़ा तस्कीने में मजलिसे चेहलुम का आयोजन किया गया। यह मजलिस सैयद आसिफ हुसैन मरहूम के ईसाले सवाब के लिए आयोजित हुई। इसमें कर्बला की कुर्बानियों के साथ मां-बाप की अजमत और बच्चों की तालीम पर संदेश दिया गया।
मजलिस की शुरुआत मौलवी मीर तालिब ने तिलावते कलाम पाक से की। इससे पहले रजा अब्बास मय हमनवां ने सोजख्वानी पेश की। पहली मजलिस को मौलाना सैयद बकी जाफरी ने खिताब किया। उन्होंने मां-बाप की अजमत पर रोशनी डालते हुए कहा कि दुनिया में उनका मर्तबा बेहद बुलंद है। मरहूमों के ईसाले सवाब का बेहतर जरिया जिक्रे कर्बला है। कर्बला का वाकया अपनों के इंतकाल का गम सहने का हौसला देता है।
दिल्ली से आए मौलाना सैयद कमर सुल्तान ने इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कुर्बानी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने कुर्बानी देकर दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत का संदेश दिया। बच्चों की तालीम पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा इंसान के लिए तरक्की के रास्ते खोलती है।
मजलिस के अंतिम दौर में शहीदाने कर्बला की कुर्बानियों और त्याग का विस्तार से जिक्र हुआ। इससे माहौल गमगीन हो गया। अकीदतमंदों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को याद किया।