अंबेडकरनगर। दीपावली पर बड़े शहरों से घर आने की राह कठिन हो गई है। कई ट्रेनों में अगले एक माह तक लंबी वेटिंग है तो वहीं नो रूम की स्थिति हो गई है। सेकेंड एसी में तो टिकट मिल पाना ही मुश्किल है। यात्रियों को ऐसे में वैकल्पिक प्रबंधों के सहारे घर तक पहुंचने के लिए प्रबंध करना पड़ रहा है।
आगामी दिनों में करवाचौथ, छठ व दीपावली पर्व है। ऐसे में परिवार के संग पर्व का उल्लास मनाने के लिए मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद, कोलकाता जैसे बड़े शहरों में नौकरी कर रहे लोग घर आने की तैयारी में हैं। उनकी इन तैयारियों में ट्रेनों का आरक्षित टिकट न मिलना सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। दरअसल अगले एक माह तक या तो लंबी वेटिंग है या फिर नो रूम है।
अकबरपुर रेलवे स्टेशन के बुकिंग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार साबरमती एक्सप्रेस में 21 अक्तूबर से 15 नवंबर तक 100 से अधिक वेटिंग है तो वहीं इसी ट्रेन के सेकेंड एसी में नो रूम है। कोटा-पटना में 24 अक्तूबर से लेकर 22 नवंबर तक 125 से अधिक वेटिंग है। मुंबई सुपर फास्ट एक्सप्रेस में स्लीपर में 500 तक वेटिंग है तो सेकेंड एसी में नो रूम है। कैफियात एक्सप्रेस में 145 से अधिक वेटिंग है जबकि सेकेंड एसी में नो रूम है। इसी प्रकार दून एक्सप्रेस, कोलकाता एक्सप्रेस, जम्मूतवी एक्सप्रेस, किसान एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेन में भी औसतन 125 वेटिंग चल रही है। इसके अलावा ज्यादातर ट्रेन में सेकेंड एसी में नो रूम है।
करनी पड़ रही वैकल्पिक व्यवस्था
मुंबई में एक निजी कंपनी में नौकरी कर रहे अकबरपुर के शहजादपुर निवासी संदीप के पिता राजकुमार ने कहा कि करवाचौथ पर्व से पहले पुत्र को आना था। लेकिन लगभग सभी ट्रेन में लंबी वेटिंग चल रही है। अब मजबूरन उसे दूसरी व्यवस्था करनी पड़ रही है। जलालपुर निवासी राहुल कुमार अहमदाबाद में नौकरी करता है। उसकी पत्नी निर्मला ने बताया कि करवाचौथ पर उसके पति नहीं आ पाएंगे। दीपावली में आने के प्रयास में लगे हैं। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था में लगे हैं। इसी प्रकार कटेहरी के रामलाल ने कहा कि उसकी पुत्री दिल्ली में रहकर बीटेक कर रही है। ट्रेन से टिकट न मिलने की दशा में अब उसे बस से बुलाना पड़ रहा है। इसी प्रकार कई अन्य परिवार का भी टिकट न मिलने का दर्द सामने आया। बुधवार को अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर मिले बसखारी के अरुण कुमार ने कहा कि वह एक निजी दूरसंचार कंपनी में नौकरी करते हैं। झारखंड के मूल निवासी हैं। टिकट के लिए आए थे लेकिन लंबी वेटिंग है। अब कुछ और व्यवस्था करते हैं। घर तो हर हाल में जाना है।