अंबेडकरनगर। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद परिषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) व्यवस्था के संचालन पर संकट मंडराने लगा है। एमडीएम निधि के बैंक खातों में सह-खातेदार बदलने संबंधी शासनादेश जारी नहीं होने से भुगतान प्रक्रिया ठप है। इससे विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने में दिक्कत की आशंका बढ़ गई है।
विद्यालयों में एमडीएम निधि का बैंक खाता सामान्यतः प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होता है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में प्रशासक नियुक्त किए गए हैं, लेकिन बैंक खातों में प्रशासकों के नाम सह-खातेदार के रूप में दर्ज करने, उनके हस्ताक्षर और मोहर से भुगतान कराने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। इसके चलते बैंक भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं।
शिक्षकों के अनुसार, खाते से भुगतान नहीं होने के कारण एमडीएम के लिए आवश्यक धनराशि का संचालन प्रभावित हो रहा है। समय रहते व्यवस्था स्पष्ट नहीं की गई तो विद्यालयों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने में परेशानी उत्पन्न हो सकती है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार मिश्र ने बताया कि समस्या से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एमडीएम व्यवस्था सीधे बच्चों के हित से जुड़ी है। शासन को तत्काल सह-खातेदार परिवर्तन के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर बैंकों को भुगतान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश देने चाहिए।