अंबेडकरनगर। महरुआ के सरखने में सोमवार को श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। प्रवाचक मुरली अचारी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची मित्रता में न अहंकार होता है न अपेक्षा। किसी भी संबंध की नींव प्रेम, त्याग और निष्ठा पर टिकती है।
सुदामा गरीबी में होते हुए भी कृष्ण से कुछ मांग नहीं पाए, जबकि भगवान ने बिना मांगे ही उन्हें कुबेर के समान समृद्ध कर दिया। कृष्ण, सुदामा का नाम सुनते ही राजमहल छोड़कर नंगे पैर द्वार तक भागे, उन्हें गले लगाया और सिंहासन पर बैठाया। जब भी भक्त कठिनाई में होता है, प्रभु स्वयं संकट हरने के लिए आते हैं। संसार में सबसे महान शक्ति भक्ति है और सबसे बड़ा धन प्रेम है। इस दौरान वृंदावन, प्रेमा, भोलानाथ, राजेश, अजय, शिवांश, हरिओम व अन्य उपस्थित रहे।