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पूर्व मंत्री को हाथियों से था लगाव, हाथी ही बना काल

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रामलखन वर्मा, पूर्व मंत्री - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। प्रदेश के कद्दावर नेताओं में शुमार जलालपुर निवासी पूर्व मंत्री रामलखन वर्मा हाथी प्रेम के लिए खासे प्रसिद्ध रहे। मंत्री रहते उन्होंने अपने सरकारी आवास परिसर में भी हाथी को पाल रखा था। चुनाव निशान हाथी के जरिए तीन बार बसपा के टिकट पर जलालपुर से विधायक बनने वाले रामलखन की मौत का कारण भी हाथी ही बना। वर्ष 2003 में उनके पालतू हाथी ने ही उन्हें रौंद दिया था। रामलखन को प्रदेश सरकार में वन एवं पंचायती राज मंत्री भी बनाया गया था। उनका कद इतना बड़ा था कि वर्ष 1995 में सपा से समर्थन वापसी के बाद जब बसपा प्रमुख मायावती ने शपथ ली तो उनके अलावा इकलौते मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले रामलखन वर्मा ही थे।
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विधानसभा चुनाव का जिक्र होते ही जलालपुर से विधायक रहे रामलखन वर्मा का नाम सहसा सामने आ जाता है। वे प्रदेश के कद्दावर नेताओं में शामिल थे। लंबी चौड़ी कद काठी वाले रामलखन अपने हाथी प्रेम के लिए जाने जाते थे। जलालपुर तहसील क्षेत्र के ताहापुर इस्माइल निवासी रामलखन ने राजनीति की शुरुआत में तब मजबूती से अपना कदम रखा जब वे 1982 में जिला पंचायत सदस्य चुन लिए गए। वर्ष 1984 में वे जलालपुर से निर्दल ही विधायकी का चुनाव लड़ गए। इसमें उन्होंने 16 हजार से अधिक मत पाकर लोगों को चौंका दिया। बाद में वे बसपा से जुड़े, जिसके चलते वर्ष 1989 में हुए आम चुनाव में उन्हें बसपा ने टिकट दे दिया। वे रिकॉर्ड 50 हजार से अधिक मत पाकर विधायक बन गए। वर्ष 1991 की रामलहर में उन्होंने एक बार फिर से बसपा के टिकट पर धमाकेदार जीत दर्ज की। वर्ष 1993 में हुए चुनाव में वे एक बार फिर से बीएसपी के टिकट पर विधायक बने। उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया गया। रामलखन को हाथी समेत घोड़े व गाय से इतना लगाव था कि मंत्री रहते उन्होंने अपने सरकारी आवास में इन्हें पाल रखा था। कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास व आसपास का क्षेत्र हाथी की चिंघाड़ से गूंजता रहता था। वे हाथी समेत गाय व घोड़े की नियमित देखभाल खुद ही करते थे। इसमें वे कर्मचारियों का भी सहयोग लेते थे, लेकिन हाथी, घोड़े व गाय को पुचकारना व उन्हें चारा पानी देना उनकी दिनचर्या में शामिल था।
हाथियों से लगाव के चलते भी अत्यंत प्रसिद्ध रहे रामलखन की मौत का कारण भी हाथी ही बना। दरअसल वर्ष 2003 के अप्रैल माह में भड़भड़पुर के निकट उनके ही पालतू हाथी ने उन्हें रौंद दिया। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने समूचे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। किसी को यह यकीन करना कठिन हो रहा था कि जिन हाथियों से उन्हें खूब लगाव था, उसी पालतू हाथी से उनकी जान चली जाएगी। हालांकि नियति को यही मंजूर था, जिस पर सभी को अंतत: भारी मन से विश्वास करना पड़ा। (संवाद)
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पांच हाथियों का करते थे पालन पोषण
पूर्व मंत्री रामलखन सिर्फ नाम भर के लिए ही हाथी के शौकीन नहीं थे। वे पांच हाथी रखते थे। इनमें से तीन हाथी तो उनके लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर जबकि दो अन्य हाथी उनके जलालपुर स्थित मिल पर रहते थे। कई घोड़े व गाय रखने के शौकीन रामलखन को पशुओं से खासा लगाव था। उन्होंने हाथियों समेत घोड़ों का नामकरण भी कर रखा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हाथियों पर उनका इतना नियंत्रण था कि एक आवाज में हाथी लगभग वह सब करते थे, जो वह चाहते थे।
माया के साथ ली थी शपथ
रामलखन वर्मा तीसरी बार विधायक चुने जाने के साथ अपना कद काफी बढ़ा चुके थे। वर्ष 1993 में बसपा के सहयोग से सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने जब मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी, तब रामलखन को बसपा की तरफ से मंत्रिमंडल में शामिल करते हुए पंचायतीराज मंत्री का महत्वपूर्ण पद दिया गया था। इस पद पर वे लगभग 22 माह तक रहे। इसके बाद बसपा व सपा में हुए विवाद के बाद जब भाजपा के सहयोग से बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्यमंत्री बनीं तो उनके शपथ लेने के अलावा इकलौते मंत्री के तौर पर रामलखन वर्मा ने ही शपथ ली थी। 18 दिन तक प्रदेश मंत्रिमंडल में वे मुख्यमंत्री मायावती के अलावा इकलौते मंत्री के तौर पर शामिल रहे। इसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार कर अन्य मंत्रियों को शामिल किया गया। सीएम मायावती ने उन्हें वन मंत्रालय की अत्यंत महत्वपूर्ण कुर्सी सौंपी थी।
अंतिम दौर में हो गए थे सपाई
पूर्व मंत्री रामलखन वर्मा अंतिम दौर में सपा में शामिल हो गए थे। जलालपुर से तीन बार विधायक रहने के बाद उन्होंने वर्ष 1996 में सपा के टिकट पर अकबरपुर विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली। समाजवादी पार्टी ने उन्हें वर्ष 1999 में पड़ोसी जनपद के सुल्तानपुर लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन दूसरे स्थान पर ही रह गए। वर्ष 2002 में उन्होंने एक बार फिर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिल पाई थी। सपा में रहते हुए ही उनका निधन हो गया।
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