अंबेडकरनगर। अकबरपुर के बहोरिकपुर में सोमवार की शाम रामलीला मंचन के दौरान परशुराम-लक्ष्मण संवाद की लीला हुई। सीता स्वयंवर में शिव धनुष भंग की कथा ने दर्शकों को भक्ति और रोमांच से भर दिया।
प्रभु श्रीराम ने गुरु की आज्ञा लेकर धनुष को उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह दो टुकड़ों में टूट गया। उसी क्षण ढोल-नगाड़े गूंज उठे और देवताओं ने पुष्पवर्षा की। धनुष टूटने की गूंज सुनते ही परशुराम मंच पर पहुंचे और अपने आराध्य शिव के धनुष को तोड़ने वाले को दंडित करने की घोषणा की। लक्ष्मण ने कहा कि मुनियों को क्रोध शोभा नहीं देता, धनुष पुराना था, प्रयास में ही टूट गया। इसके बाद भगवान राम और माता सीता का स्वयंवर हुआ। पंडाल राम-सीता के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान मेहीलाल धुरिया, प्रदीप श्रीवास्तव, अमित श्रीवास्तव, अनिल श्रीवास्तव और अभिषेक श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
अकबरपुर के इल्तिफातगंज मार्ग स्थित हनुमान मंदिर के निकट रामायण मंचन में कैकेयी-मंथरा संवाद का दृश्य प्रस्तुत किया गया। मंथरा ने कैकेयी को भरत के हित में राम के वनवास की सलाह दी। कैकेयी ने दशरथ से भरत को राजा बनाने और राम को 14 वर्षों के लिए वन भेजने के वरदान मांगे। राजा दशरथ की पीड़ा को कलाकारों ने भावपूर्ण ढंग से निभाया। पुत्र प्रेम और वचनबद्धता के बीच उलझे दशरथ की वेदना देख दर्शकों की आंखें भर आईं।
जलालपुर में रामलीला मैदान पर राम-सुग्रीव मित्रता व अशोक वाटिका में हनुमान-सीता संवाद का मंचन किया गया। आरती के दौरान जयकारों से वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम में भाजपा अयोध्या जिला प्रभारी डाॅ. मिथिलेश त्रिपाठी और केके मिश्र का स्वागत माला और अंगवस्त्र से हुआ। रामलीला ने धर्म, कर्तव्य और सत्य की विजय का संदेश दिया। संदीप अग्रहरि और सुरेंद्र सोनी के निर्देशन में भव्य झांकी निकाली गई। मानस गंगा प्रियंका पांडेय ने रामकथा सुनाई, जिससे जनमानस में भक्ति और संस्कृति का संचार हुआ।
जमुनीपुर में नवीन कलामंडल रामलीला समिति, अरिया बाजार फतेहपुर के तत्वावधान में पांचवें दिन सीताहरण, राम-सुग्रीव मित्रता व शबरी प्रेम का मंचन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत महिषासुर मर्दिनी की आरती से हुई। श्रीराम के वियोग और वन में भटकने का दृश्य दर्शकों को भावुक कर गया। हनुमान जी ने राम-सुग्रीव की मित्रता कराई।
.अकबरपुर के बहोरिकपुर में परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रदर्शन करते कलाकार।
.अकबरपुर के बहोरिकपुर में परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रदर्शन करते कलाकार।