कुल हिंद नातिया मुशायरे में मंच से कलाम पेश करते शायर।
अंबेडकरनगर। ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर सोमवार देर रात किछौछा दरगाह स्थित खानकाह-ए-रबाते अशरफ में नातिया कलामों की ऐसी महफिल सजी कि पूरा परिसर देर रात तक रूहानियत से सराबोर रहा। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे शायरों और नातख्वानों ने अपने कलाम पेश कर समां बांध दिया। कलामों पर जहां श्रोता झूमते नजर आए, वहीं बार-बार गूंजती वाहवाही से माहौल नूरानी हो उठा।
कुल हिंद नातिया मुशायरे की सरपरस्ती ताजुल इस्लाम सैय्यद निजामुद्दीन अशरफ और मौलाना सैय्यद आरफ अशरफ ने की। संचालन कफील अंबर कलकत्तवी ने किया। शायर ताहिर रजा ने तेरा मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह पेश किया तो पूरा मजमा उनके साथ गुनगुनाने लगा। वहीं अहमदुल फत्ताह ने ‘तेरी नस्लें पाक में हैं, बच्चा-बच्चा नूर का...सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। वक्ताओं ने धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश दिए, जिन्हें श्रोताओं ने पूरी तल्लीनता से सुना। अंत में मौलाना सैय्यद आरफ अशरफ ने सलाम पढ़कर कार्यक्रम का समापन किया। मौलाना मोहम्मद कासिम अशरफी, डॉ. सैय्यद मोहम्मद नफीस, लाइक खान, आसिफ खान, सैय्यद नुरूल ऐन अशरफ, मोहम्मद सब्बीर, आसिफ सिद्दीकी समेत बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
कुल हिंद नातिया मुशायरे में मंच से कलाम पेश करते शायर।