अपर जनपद न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट ने वरिष्ठ जेल अधीक्षक फैजाबाद का वह प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया, जिसमें जेल स्थानांतरण को लेकर शासन के निर्णय का हवाला दिया गया था। इसके साथ ही खान मुबारक को दूसरी जेल भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया है।
फैजाबाद जेल में बंद माफिया खान मुबारक की आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए बीते दिनों जिला मजिस्ट्रेट विवेक ने उसे किसी दूरस्थ जेल में स्थानांतरित करने की संस्तुति की थी। यह संस्तुति जेल में बंद खान के दो वीडियो सामने आने के बाद की गई थी।
इसमें एक में वह एक व्यवसायी की कोड़े से पिटाई कर रहा था तो दूसरे में फैजाबाद जेल के अंदर से वह खाकी व खादी को अंजाम भुगतने की चेतावनी दे रहा था। शासन ने उसे बरेली जेल में शिफ्ट किए जाने की अनुमति प्रदान कर दी थी। इसी बीच माफिया ने अपर जनपद न्यायाधीश गैंगेस्टर कोर्ट में अर्जी देकर दूसरी जेल में भेजे जाने पर रोक लगाए जाने का अनुरोध किया था।
जनपद न्यायाधीश गैंगेस्टर अनिल कुमार ने शनिवार को हुई सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज सुनाए फैसले में न्यायालय ने जेल स्थानांतरण संबंधी वरिष्ठ जेल अधीक्षक के उस प्रार्थना पत्र को मंजूरी दे दी है, जिसमें खान मुबारक को बरेली जेल शिफ्ट किए जाने का निर्णय लिया गया था। पुलिस अधीक्षक पंकज ने जेल स्थानांतरण की अनुमति मिल जाने की पुष्टि की है।
सिर्फ एक मामले में लागू होगा यह फैसला
फैजाबाद जेल में बंद माफिया खान मुबारक को बरेली जेल शिफ्ट किए जाने के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद एक नया पेच सामने आ गया है।
दरअसल हत्या व साजिश रचने की जिस धारा में उसका मामला एडीजे चतुर्थ कोर्ट में विचाराधीन है, उसी मामले में ही कोर्ट ने यह अनुमति प्रदान की है। जज ने अपने फैसले में कहा कि अन्य कोर्ट में चल रहे मामलों में यह फैसला मान्य नहीं होगा। बताते चलें कि दो तीन अन्य मामलों में भी माफिया खान मुबारक अंबेडकरनगर न्यायालय के मुकदमों में विचाराधीन है।
सुरक्षा के सवालों पर हो फिर से विचार
न्यायालय में अर्जी देकर माफिया खान मुबारक ने कहा था कि उसके तमाम विरोधियों में वर्तमान समय में प्रदेश सरकार में विधायक व मंत्री हैं। उसके ऊपर रंजिशन राजनीतिक दबाव में रासुका लगवाया गया है। उसे राजनीतिक दबाव में बरेली जेल भेजने का प्रयास किया जा रहा है। वहां कोई हाई सिक्योरिटी बैरक नहीं है।
ऐसे में उसकी सुरक्षा पर खतरा है। बरेली से अंबेडकरनगर की दूरी 450 किलोमीटर होने के कारण ट्रेन से पेशी के दौरान पुलिस उसका एनकाउंटर भी कर सकती है। ऐसे में उसकी सुरक्षा का बड़ा सवाल है। न्यायाधीश ने अपने फैसले में अनुमति तो प्रदान कर दी, लेकिन कहा है कि खान मुबारक द्वारा उठाए गए सुरक्षा व लम्बी दूरी से लाने व ले जाने को लेकर सुरक्षा संबंधी सवालों पर पुनर्विचार अनिवार्य है।