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Ambedkar Nagar News: लंका दहन की लीला देख भाव विभोर हुए दर्शक

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अकबरपुर के इ​ल्तिफातगंंज मार्ग पर चल रही रामलीला में मंचन करते कलाकार। आयोजक।
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अंबेडकरनगर। जिले के विभिन्न कस्बों और बाजारों में आयोजित रामलीलाओं में रविवार रात रामायण के विविध प्रसंगों का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से धर्म, भक्ति, मित्रता और अहंकार के परिणामों का संदेश दिया। शहर के इल्तिफातगंज मार्ग, शहजादपुर, टांडा, जमुनीपुर और जलालपुर में लंका दहन की लीला आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, बसखारी में नारद मोह प्रसंग का मंचन कर दर्शकों को भाव-विभोर किया गया।
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शहर के इल्तिफातगंज मार्ग स्थित रामलीला और शहजादपुर के रामलीला मंच पर हनुमान जी की लंका यात्रा, रावण की सभा में पहुंचने और लंका दहन के प्रसंगों का मंचन हुआ। कलाकारों ने हनुमान जी के पराक्रम और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति को जीवंत किया। लंका दहन के दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इससे पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
टांडा नगर के कस्बा मोहल्ले में आयोजित रामलीला में राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता की खोज, हनुमान-विभीषण मिलन और लंका दहन की लीला प्रस्तुत की गई। अशोक वाटिका में हनुमान जी की माता सीता से भेंट और लंका दहन के दृश्यों ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
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जमुनीपुर के फतेहपुर अरिया बाजार स्थित नवीन कला मंडल में सात दिवसीय रामलीला के छठवें दिन सीता खोज से लंका दहन तक के प्रसंगों का मंचन किया गया। इसमें राम-लक्ष्मण का किष्किंधा पहुंचना, सुग्रीव से मित्रता, बाली वध और वानर सेना को सीता की खोज में भेजने के दृश्य दिखाए गए। हनुमान जी के समुद्र लांघकर लंका पहुंचने, अशोक वाटिका में सीता से भेंट करने, अक्षय कुमार वध और पूंछ में आग लगाए जाने के बाद लंका दहन का मंचन हुआ।
शबरी आश्रम से लंका दहन तक की लीला
जलालपुर। रामलीला मैदान में श्रीरामलीला सेवा समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शबरी आश्रम, राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध, सीता की खोज और लंका दहन के प्रसंग प्रस्तुत किए गए। इस दौरान समिति अध्यक्ष संजीव मिश्र समेत राम किशोर राजभर, डॉ. रजनीश सिंह, मिथिलेश त्रिपाठी, संदीप अग्रहरि, कृष्ण गोपाल गुप्ता और अन्य पदाधिकारी व श्रद्धालु मौजूद रहे। (संवाद)
नारद मोह की लीला ने खींचा ध्यान
बसखारी। कस्बे में 11 दिवसीय श्रीरामलीला के दूसरे दिन नारद मोह का मंचन किया गया। कलाकारों ने नारद मुनि की तपस्या, कामदेव के प्रयास विफल होने, नारद के अभिमान और भगवान विष्णु की माया के प्रसंग दिखाए। विश्व मोहिनी के स्वयंवर में भगवान विष्णु के चयन से नारद मुनि के क्रोधित होने और उन्हें पत्नी वियोग का श्राप देने का दृश्य दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। मंचन से पहले भगवान विष्णु की झांकी निकाली गई। समिति संरक्षक सत्यम सिंघल और संयोजक रामकुमार गुप्त ने आरती उतारी। (संवाद)
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