पिसावां (सीतापुर)। कस्बे में बाबू सिंह इंटर काॅलेज के समीप चल रही रामलीला के छठे दिन जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के कलाकारों ने राम-केवट संवाद, श्रवन कुमार के माता-पिता का दशरथ को श्राप देने का सजीव मंचन किया। राम-केवट संवाद का जीवंत मंचन देख श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
मंचन में दिखाया गया कि जब प्रभु श्रीराम वन में निषादराज के पास थे, तभी वट वृक्ष का दूध मंगाकर जटा बनाई। जिसे देख सुमंत दुखी होकर रोने लगे। तब भगवान राम ने मंत्री सुमंत को धर्म उपदेश देकर पिता के पास अयोध्या विदा भेजा। इसके बाद स्वयं जानकी व लखन लाल के साथ आगे गंगा तट पर पहुंचे। वहां केवट से गंगा के उस पार जाने को नाव मांगी।
तब प्रेम भरे शब्दों में केवट कहते हैं कि प्रभु आपके पैर लगने से एक पत्थर की शिला स्त्री बन गई और पत्थर से कोमल लकड़ी होती है, यदि मेरी नाव भी किसी की पत्नी बन गई तो मैं भूखा मर जाऊंगा। इस कारण आप तीनों के जब तक गंगा जल से पैर नही धो लूंगा, तब तक आपको नौका में नही बैठाऊंगा। केवट की भक्ति देख राम मन ही मन मुस्कुराते हुए इशारा करते हैं, तब केवट जल लाकर चरण धोने के बाद तीनों को गंगा पार पहुंचाकर अपने जीवन को धन्य करता है। गंगा पार जाकर प्रभु श्रीराम बाल्मीकि मुनि के आश्रम जाते हैं। मंचन में आगे दिखाया गया कि राम के वियोग में दम तोड़ते समय राजा दशरथ को श्रवण कुमार के अंधे माता पिता का श्राप याद आता है। एक बार श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को तीर्थाटन के लिए ले जा रहे होते हैं। रास्ते में प्यास लगने के कारण वह जल लेने जाते हैं।
उसी समय राजा दशरथ शिकार के लिए गए होते हैं। श्रवण जब जलपात्र में जल भर रहे होते हैं तो दशरथ को लगता है कि कोई हिरण पानी पी रहा है। वे शब्द भेदी बाण चला देते हैं। इससे श्रवण की मृत्यु हो जाती है। तब दुखी होकर श्रवण जब अंधे माता-पिता दशरथ को पुत्र वियोग में मरने का श्राप देते हैं।