अंबेडकरनगर। तंजीम रजाए इलाही के तत्वावधान में अकबरपुर नगर के मीरानपुर स्थित शाही इमामबारगाह में तीन दिवसीय सालाना मजलिस में उलेमा ने आतंकवाद को देश के लिए बड़ा नुकसान बताया। कहा कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। वे ऐसे युवा होते हैं, जो अशिक्षित और बेरोजगार होते हैं। ऐसे लोगों में इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं होती। ऐसे लोग चंद रुपयों के चक्कर में राह भटक जाते हैं। हम सभी को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा। इनका डटकर मुकाबला करना होगा। आतंकवाद को देश से जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए हम सभी को एकजुट होकर सामने आना होगा।
सफीरे हुसैनी के नाम से तीन दिवसीय सालाना मजलिस एक दिन पहले गुरुवार को शुरु हुई थी। दूसरे दिन शुक्रवार को मजलिस में मौलाना नूरुल हसन ने कहा कि जब युवाओं में शिक्षा व रोजगार की कमीं होती है, तो वह दूसरे रास्तों से धन कमाना चाहते हैं। ऐसे में चंद सिक्कों के लिए वे अपनी आत्मा को बेच देते हैं। ऐसा करते समय वह यह भी नहीं देखते कि उनके ऐसा करने से परिवार, समाज व देश को कितना नुकसान है।
जेहाद के नाम पर उन्हें बरगलाया जाता है। उन्हें धन की लालच दी जाती है। इन सब में फंसकर वह आंतकवाद के रास्ते पर चलने लगते हैं। ऐसे लोगों की जिंदगी बहुत अधिक लंबी नहीं होती है। देश से आतंकवाद को जड़ से समाप्त करने के लिए सभी को शिक्षित होना होगा। संस्कारयुक्त शिक्षा ग्रहण करने वाला कभी भी सच्चे मार्ग से भटक नहीं सकता।
बाद में मौलाना ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। कार्यक्रम का संचालन आरिफ अनवर ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रेहान जैदी, रजा अनवर, यासिर हुसैन आदि का मुख्य योगदान रहा। आयोजन समिति से जुड़े यासिर हुसैन ने बताया कि शनिवार को अंतिम दिन मजलिस बाद लोगों को अलम व ताबूत की जियारत कराई जाएगी।