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शिक्षक तैनाती के फर्जीवाड़े का खुलासा

Fri, 11 Sep 2015 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अंबेडकरनगर
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शिकायत के बाद एसडीएम सदर से कराई गई जांच में मामला सही पाए जाने पर डीएम ने जिला विद्यालय निरीक्षक को नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर जवाब मांगा है । शिक्षक की जॉइनिंग तो विद्यालय में सितंबर में दिखाई गई है लेकिन भुगतान के लिए उसका बिल अगस्त माह से ही भेज दिया गया।
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मालूम हो लक्ष्मी कुंवरि इंटर कॉलेज ताराखुर्द में उच्च न्यायालय के वर्ष 2012 में 30 मई को दिए गए एक आदेश का हवाला देते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक डा. आरपी वर्मा ने विद्यालय प्रशासन को अंजनी कुमार पांडेय को बतौर शिक्षक कार्य लेने एवं वेतन भुगतान का निर्देश दिया था।

खास बात यह कि वर्ष 2012 से लेकर बीते दिनों तक दो और डीआईओएस जिले में रहे लेकिन उनके जॉइनिंग का ादेश नहीं दिया था। डीआईओएस के निर्देश पर अंजनी को विद्यालय में बतौर शिक्षक जॉइन भी करा दिया गया।
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इसी बीच नसीरपुर कैथी निवासी सत्येंद्र कुमार तिवारी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर शिकायत की यह आादेश उच्च न्यायालय को भ्रमित करके फर्जी करके से हासिल किया गया है।

इसी आदेश की आड़ में फर्जी ढंग से तैनाती की गई है। बताया कोर्ट का आदेश था कि यदि अंजनी को पूर्व में कार्य करने के बदले वेतन भुगतान किया गया है, तो उनसे कार्य लिया जाए। शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित शिक्षक की पूर्व में तैनाती ही नहीं थी।

डीएम ने इस पर एसडीएम सदर पंकज को जांच सौंपी तो शिकायत सही पाई गई। एसडीएम ने जांच रिपोर्ट में कहा कि कोर्ट के जिस आदेश का हवाला देकर अंजनी पांडेय को जॉइन कराया गया है, वह प्रभावी ही नहीं है। एसडीएम ने रिपोर्ट में विद्यालय के रिकार्ड व तमाम शिक्षकों के हस्ताक्षर आदि का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा भी पूर्व में कार्य करने की पुष्टि नहीं की गई।

एसडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में इसे अत्यंत आपत्तिजनक माना। जांच में पता चला कि अंजनी की तैनाती तो सितंबर माह में की गई है लेकिन भुगतान के लिए बिल कोषागार में अगस्त माह का भेज दिया गया। एसडीएम ने डीआईओएस पर कठोर विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति के साथ ही विद्यालय के प्राधिकृत नियंत्रक पर भी कार्रवाई की संस्तुति की। इस क्रम में डीएम विवेक ने डीआईओएस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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उधर जिला विद्यालय निरीक्षक ने बताया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही उनके द्वारा निर्देश दिए गए थे। आगे की कार्रवाई देखी जा रही है।
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