केदारनगर (अंबेडकरनगर)। इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव निवासी सुधा संघर्ष की मिसाल बन चुकी हैं। करीब 8 वर्ष पहले आर्थिक तंगी से हारकर उत्तर प्रदेश होमगार्ड के जवान रहे पिता ने आत्महत्या कर ली, मां का भी करीब 6 माह बाद निधन हो गया। 6 बहनों में से सिर्फ बड़ी बहन का विवाह हो पाया था। दूसरे नंबर की बहन की शादी तय हो चुकी थी। ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी सुधा ने संभालने का निर्णय लिया। 18 वर्ष की उम्र पूरा करने के बाद होमगार्ड बनी। कुछ समय बाद खुद से बड़ी बहन की शादी भी पूरे रीति रिवाज के साथ किया। इसके बाद तीन अन्य बहनों का हौसला भी नहीं टूटने दिया।
भारतीय राष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी महिलाओं के संघर्षों का जिक्र करना जरूरी हो जाता है। ऐसी महिलाएं न सिर्फ अन्य महिलाओं के लिए बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इब्राहिमपुर थाना क्षेत्र के तिवारीपुर गांव निवासी होमगार्ड जवान स्व. कृष्णकुमार तिवारी की पुत्री सुधा महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी हैं। सुधा जिले में बतौर होमगार्ड तैनात हैं। अपनी तीन बहनों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही बेहतर देखरेख भी कर रही हैं। भारतीय राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अमर उजाला ने सुधा के संघर्षों को जाना। पता चला कि माता-पिता की मृत्यु के बाद 6 बहनों में सुधा तीसरे नंबर पर थीं। उस समय उनकी उम्र करीब 17 वर्ष थी।
माता-पिता की मौत से पहले एक बड़ी बहन की शादी हुई थी, जबकि दूसरे नंबर की बहन की शादी तय हुई थी, इस बीच मां का निधन हो गया। पांचों बहनों ने परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेके। पिता के निधन के करीब एक वर्ष बाद 18 वर्ष की उम्र पूरा करने के बाद सुधा होमगार्ड बनीं। इसके बाद खुद से बड़ी बहन की शादी रीति रिवाज के अनुसार किया। तीन अन्य बहनों का पालन पोषण, शिक्षा दीक्षा का प्रबंध करती आ रही हैं।
बहनें भी बेहतर शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ रही हैं। इसी वर्ष सुधा ने अपनी शादी भी की। इसके बाद भी अपनी ड्यूटी एवं तीनों बहनों की जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा से करती आ रही हैं। सुधा के चचेरे भाई रामप्रकाश ने बताया कि सुधा ने अद्वितीय संघर्ष और दृढ़ता का परिचय दिया है। पूर्व प्रधान अनिल तिवारी, वीरसेन सिंह, प्रभाकर पांडेय व रणविजय सिंह भी सुधा के संघर्षों के कायल हैं।