शिकायत के मुताबिक संवेदनहीनता की हद पार करते हुए चिकित्सालय के कर्मचारी ने घायल को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर के लिए तभी रेफर किया, जब मरीज के साथ आए उसे लोगों ने एक हजार रुपये दे दिए। परिजनों ने प्रकरण की लिखित शिकायत सीएमएस से की है। सीएमएस ने मामला स्वीकार किया है।
जिला अस्पताल में मरीजों के शोषण की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कभी आपरेशन के नाम पर अवैध वसूली की जाती है, तो कभी जांच के नाम पर। शिकायतें होती हैं लेकिन आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने से मरीजों को शोषण होता रहता है।
जानकारी के मुताबिक मालीपुर थाना क्षेत्र के खालिसपुर भटौली गांव निवासी राजमणि (35) पुत्र रामआसरे मंगलवार देर शाम सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत की गंभीरता को देखते हुए परिवारीजनों ने मंगलवार देर रात वहां मौजूद एक कर्मचारी से घायल को लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किए जाने का अनुरोध किया।
आरोप है कि रेफर कराए जाने वाले फार्म की औपचारिकता पूरी कराने के लिए कर्मचारी ने उनके एक हजार रुपये की मांग की। दुर्घटना के चलते पहले से ही परेशान परिजनों ने पहले तो इस पर आपत्ति जतायी फिर काफी देर तक कहासुनी के बाद एक हजार रुपये कर्मचारी को दे दिया।
इसके बाद कर्मचारी ने रेफर किए जाने के सभी कागजात तैयार कराए। बाद में उसे रेफर किया गया। घायल के भाई पंचराम ने बताया कि अस्पताल में रात की ड्यूटी के दौरान मौजूद एक कर्मचारी जिसे वह पहचान सकता है ने उससे एक हजार रुपए की वसूली के बाद ही रेफर का कागज बनवाकर दिया।
पंचराम ने बुधवार को डा केएस पांडेय से मुलाकात की और उन्हें लिखित पत्र देकर कर्मचारी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई किए जाने एवं दी गई धनराशि वापस कराए जाने की मांग की।