थाना परिसर में दोनों के बीच जमकर कहासुनी व एक दूसरे को देख लेने तक की नौबत आ गई। प्रकरण की जानकारी होने पर एसपी ने दरोगा को लाइन हाजिर करतेहुए शनिवार को एसओ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
मालूम हो कि थाना क्षेत्र के एक मामले की विवेचना थाने पर तैनात दरोगा संतोष को मिली हुई थी। उन्होंने मामले में विवेचना करते हुए दो आरोपियों का नाम घटना से निकाल दिया। बताया जाता है कि नाम निकाले जाने में उन्होंने एसओ को विश्वास में नहीं लिया और अपनी प्रक्रिया पूरी करते हुए केस डायरी सीओ के पास भेज दिया।
इसी बीच एक जनप्रतिनिधि को नाम निकाले जाने की जानकारी हुई, तो उसने एसओ को फोन किया। एसओ ने अनभिज्ञता प्रकट कर दी, तो जनप्रतिनिधि एसओ पर ही बरस पड़े। इसके बाद एसओ अरशद सिद्दीकी ने थाने में तैनात दरोगा संतोष से पूछा कि क्या नाम विवेचना से निकाला है, तो उन्होंने बताया कि हां ऐसा किया गया है।
बस इसी बात को लेकर थाना परिसर में एसओ व दरोगा आपस में भिड़ गए। तेज आवाज में एक दूसरे के विरुद्ध जमकर आक्रोश का इजहार किया गया और एक दूसरे को देख लेने की धमकी भी दी गई। साथी पुलिसकर्मियों ने किसी तरह बीच बचाव कर मामला शांत कराया। घटना की जानकारी एसपी को हुई, तो उन्होंने दरोगा संतोष को एक दिन पहले लाइन हाजिर कर दिया।
उस समय तक तो एसओ बालबाल बच गए, लेकिन बाद में एसपी को पता चला कि थानाध्यक्ष द्वारा अपने ही दरोगा को संबंधित जनप्रतिनिधि के सामने पेश कराने की चेतावनी दी जा रही थी। एसपी ने इसे बड़ी अनुशासनहीनता व मनमानी मानते हुए थानाध्यक्ष अरशद सिद्दीकी को नायब दरोगा से भी बड़ी और कड़ी सजा दी।
उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हंसवर थाने में तनवीर को अब नया प्रभारी बनाया गया है। सीओ टांडा राघवेंद्र मिश्र ने बताया कि अनुशासनहीनता के कारण दोनों दरोगाओं पर कार्रवाई की गई है। एक को पहले ही लाइन हाजिर किया गया था, जबकि एसओ को निलंबित कर दिया गया है। उधर पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय ने कार्रवाई की पुष्टि की है।