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श्रीरामलीला मंचन सनातन धर्म जानने का सशक्त माध्यम

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आलापुर। रामलीला का मंचन सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि यह सनातन को जानने का माध्यम है। सभी का दायित्व है कि इसके आयोजन में सहयोग के साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों से सीख लेकर समाज की बेहतरी तय करें। भगवान श्रीराम अपने जीवन काल के सभी रूपों में पूजनीय हैं। रामलीला हमारे समाज को एक सकारात्मक व संगठनात्मक विचाराधारा के लिए प्रेरित करती है।
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ये विचार शुक्रवार रात मुख्य अतिथि व पूर्व सांसद त्रिभुवनदत्त ने मदुआना गांव में रामलीला मंचन का शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए। कहा कि हमारा आधार तभी मजबूत होगा जब अपने पूर्वजों के बारे में जानकारी होगी। रामायण सनातन धर्म की आधारशिला है। इसके अध्ययन से हमें न सिर्फ अपने जीवन की कठिनाइयों से निपटने में मदद मिलती है बल्कि समाज को एक नई दिशा देने की सीख भी। उन्होंने रामलीला आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। कहा कि ऐसे सराहनीय कार्यों के माध्यम से ही हम समाज के युवाओं को एक नई दिशा दे सकते हैं। रामलीला शुभारंभ मौके पर कलाकारों ने कई प्रसंगों का मनमोहक मंचन किया। इस मौके हीरालाल वर्मा, रामचंद्र वर्मा, अजय गौतम, प्रमोद मिश्र, रामचेत वर्मा, संजय वर्मा, हनुमंत वर्मा, रमेश, रामउजागिर आदि मौजूद रहे।
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