सहालग के मौसम में जिले के बैंक व एटीएम में कैश संकट के चलते उपभोक्ताओं में हाहाकार मच गया है। रविवार को तो मुसीबत और भी ज्यादा बड़ी होकर सामने आई। कुल 125 के सापेक्ष 100 से अधिक एटीएम नहीं खुले। नतीजतन धन-निकासी के लिए हजारों उपभोक्ताओं को एक से दूसरे एटीएम के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ा।
जिन इक्का-दुक्का एटीएम से धन-निकासी हुई भी, वहां लंबी लाइन लगी रही। नोटबंदी के बाद बेपटरी हुई एटीएम सेवा धीरे-धीरे पटरी पर आ ही रही थी कि इस बीच लगभग पखवारे भर से एक बार फिर कैश का संकट खड़ा होना शुरू हो गया।
पहले तो बैंक शाखाओं में थोड़ी-बहुत दिक्कत धन-निकासी में आनी शुरू हुई लेकिन कुछ दिनों से सबसे ज्यादा प्रभावित एटीएम सेवा हुआ है। आरबीआई से जिले को कम रकम मिलने का नतीजा है कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों के लगभग 125 एटीएम के सापेक्ष 100 से अधिक एटीएम के ताले रविवार को खुल ही नहीं पाए।
जिला मुख्यालय पर एचडीएफसी मुख्य शाखा को छोड़ दिया जाए तो 10 से अधिक एटीएम के शटर या तो खुले नहीं या तो खुलने के बाद भी उन पर पैसे न होने का बोर्ड चस्पा रहा। जलालपुर प्रतिनिधि के अनुसार नगर में यूनियन बैंक के एटीएम को छोड़ अन्य बैंकों के 7 एटीएम रविवार को चल नहीं पाए।
बसखारी प्रतिनिधि के अनुसार बाजार व आसपास के 8 एटीएम में से एक भी एटीएम उपभोक्ताओं का साथ देने में रविवार को सफल नहीं हुए। टांडा, आलापुर व भीटी तहसील प्रतिनिधियों के अनुसार ज्यादातर एटीएम रविवार को बंद ही पड़े रहे। सहालग के दौर के चलते इस बीच उपभोक्ताओं को इन हालात से तगड़ा झटका लगा।
रविवार को भी लगन के चलते शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के एटीएम से धन-निकासी को पहुंचे लोगों में से ज्यादातर को निराश होना पड़ा। उपभोक्ता चंद्रभूषण तिवारी व महेंद्र पांडेय ने कहा कि सहालग के इस दौर में जिम्मेदार लोगों को बैंक व एटीएम सेवा दुरुस्त रखनी चाहिए।
लोगों को जरूरत के अनुरूप पैसा मिल सके, यह सुनिश्चित करना होगा। मौजूदा स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। विवेकानंद व केदार यादव ने कहा कि बैंकों से लेकर एटीएम तक कैश का संकट खड़ा हो गया है। उपभोक्ताओं को उनके ही खाते में जमा रकम मनचाहे ढंग से नहीं मिल पा रही है।
अब एटीएम सेवाओं ने भी लगभग साथ छोड़ दिया है। एलडीएम अरुण कुमार सिंहने बताया कि इन दिनों आरबीआई से कैश कम मिल पा रहा है। इसके चलते बैंक शाखाओं में भी लेनदेन प्रभावित है तो एटीएम सेवाएं भी प्रभावित हैं। एक कारण यह भी है कि बैंकों से धन-निकासी के बाद रकम जमा करने की गति अत्यंत धीमी है।