गन्ने की बोआई के लिए रकबे के सर्वे में अब मनमानी नहीं बरती जा सकेगी। दरअसल इस बार सर्वे करने वाले जीपीएस सिस्टम को और पुख्ता कर दिया गया है। पहले जीपीएस के जरिये सिर्फ मिल प्रशासन को ही उससे जुड़ी सूचना मिलती थी। अब इससे जुड़ी सूचना किसान भी ऑनलाइन देख सकेंगे।
20 जून तक चलने वाले सर्वे के लिए कुल 90 टीमों को लगाया गया है। विगत वर्ष जहां 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में 31 हजार किसानों ने गन्ने की बोआई की थी, वहीं इस बार 22 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में की जाएगी। गौरतलब है कि जिले में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती की जाती है। इसका प्रत्येक वर्ष अकबरपुर चीनी मिल द्वारा बाकायदा सर्वे कराया जाता है।
पूर्व में यह सर्वे जीपीएस से कराया जाता है। इसमें अक्सर कुछ लोग दूसरे के खेत का सर्वे अपने नाम कराकर उसका लाभ ले लिया करते थे। इस पर अंकुश लगाने के लिए इस बार जीपीएस को और व्यापक कर दिया गया है। जिले में सर्वे का कार्य बीते दिनों ही शुरू किया गया है। विगत वर्ष 31 हजार किसानों ने 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की बोआई की थी।
इस बार 22 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में बोआई किए जाने की संभावना है। बीते दिनों शुरू हुए सर्वे कार्य में कुल 90 टीमों को लगाया गया है। सर्वे कार्य 20 जून तक पूर्ण कर लिया जाएगा। मुख्य गन्ना प्रबंधक अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि जिस गांव के खेतों का सर्वे करना होगा, वहां के किसानों के मोबाइल पर एक दिन पहले ही इसकी जानकारी दे दी जाएगी।
किसानों से कहा गया है कि वे स्वयं खेत में खड़े होकर सर्वे कराएं। कारण यह कि ऑनलाइन हो जाने के चलते अब किसी रकबे का एक बार ही सर्वे हो सकेगा। दोबारा सर्वे का कार्य नहीं होगा। समय रहते सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।