यात्रियों के हित की अनदेखी किए जाने का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि किसी बस के शीशे क्षतिग्रस्त हैं, तो किसी की सीटें। किसी की लाइट खराब है, तो किसी में फागिंग लाइट ही नदारद है।
46 बसों के बेड़े में 15 बसें तो ऐसी हैं, जो नीलामी की सीमा पार कर चुकी हैं, वहीं 12 बसें नीलामी की कगार पर हैं। इनमें से 13 बसें ऐसी हैं, जिनकी लाइट ठीक से काम नहीं कर रही है, तो 15 से अधिक बसें ऐसी हैं, जिसमें फागिंग लाइट नहीं हैं। इससे यात्री ठंडक से जूझते हुए यात्रा करने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक मुश्किलें रात्रि में यात्रा करने वाले यात्रियों को उठानी पड़ रही हैं। यात्रियों की मांग के बाद भी क्षतिग्रस्त खिड़कियों के शीशों व सीटों को दुरुस्त कराने को लेकर विभागीय अधिकारी गंभीर नहीं हैं।