कोर्ट व प्रदेश सरकार के निर्देशों के बाद भी जिले में पालिथीन की बिक्री रोकने को लेकर एक दिन पहले कोई भी सक्रियता प्रशासन में नहीं दिखी। रोक को लेकर बेफिक्री का ही माहौल दिखा। इसके चलते ही एक दिन पहले बुधवार को भी जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी बड़ी बाजारों में धड़ल्ले से पॉलिथीन का प्रयोग होते दिखा।
गौरतलब है कि लगातार प्रदूषित होते वातावरण को देखते हुए बीते दिनों न्यायालय ने पॉलिथीन की बिक्री व प्रयोग पर पूरी तरह रोक दिया था। हालांकि रोक के बाद भी प्रदेश में धड़ल्ले से इसका प्रयोग हो रहा था। न्यायालय के निर्देश के बाद शासन ने 21 जनवरी से पॉलिथीन के निर्माण, बिक्री व प्रयोग पर पूरी तरह रोक लगाए जाने की घोषणा की।
यह अलग बात है कि तमाम दिशा निर्देशों के बाद भी जिला मुख्यालय सहित अन्य छोटी बड़ी बाजारों में पालिथीन का न सिर्फ धड़ल्ले से प्रयोग जारी है, वरन छोटी बड़ी दुकानों में बिक्री भी की जा रही है। न सिर्फ खाद्य सामग्रियों के लिए पालिथीन का प्रयोग हो रहा है, बल्कि अन्य सामग्रियां भी पालिथीन में ही रखकर दिया जा रहा है।
इस बीच 21 जनवरी गुरुवार से पालिथीन के प्रयोग व बिक्री पर पूरी तरह अंकुश लगने का जो निर्देश है, उसका पालन कराने को लेकर जिले में कोई कार्य योजना सामने नहीं आ सकी है। न तो किसी अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई और न ही किसी टीम का गठन किया गया।
धड़ल्ले से अभी भी शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पॉलिथीन का ही प्रयोग होता आ रहा है। एक दिन पहले बुधवार तक जिला मुख्यालय पर ही विभिन्न प्रतिष्ठानों व दुकानों पर पॉलिथीन का प्रयोग होता दिखा। अब ऐसे में गुरुवार से पॉलिथीन की बिक्री रुक पाना संभव नहीं दिख रहा। जाहिर तौर पर शासन व न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन होते हुए पॉलिथीन की बिक्री पूरे जिले में होगी।