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बसपा नेता की चालक के साथ हत्या कर फैला दी थी सनसनी

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अंबेडकरनगर। माफिया सरगना खान मुबारक के शूटर परवेज ने तीन वर्ष पहले बसपा नेता जुरगाम मेंहदी और उनके चालक शुभनीत की हत्या कर सनसनी फैला दी थी। परवेज और उसके साथियों ने अत्यंत बेखौफ और दुर्दांत अंदाज में वारदात को अंजाम दिया था। इस दोहरे हत्याकांड की गूंज प्रदेश की राजधानी तक सुनाई पड़ी थी। इस हत्याकांड को लेकर नागरिकों में कड़ी नाराजगी भी दिखी थी, जिसे काबू में रखने के लिए जनपद पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी।
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हंसवर थाना क्षेत्र अंतर्गत नसीराबाद निवासी बसपा नेता जुरगाम मेंहदी वर्ष 2018 में निजी चार पहिया वाहन से जनपद न्यायालय जा रहे थे। गांव से कुछ दूर आगे बढ़ने पर हंसवर थाना क्षेत्र में ही 3-4 बाइकों से आए बदमाशों ने घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग दोनों तरफ से शुरू कर दी। इसमें जुरगाम और चालक शुभनीत यादव की मौत हो गई। इस दोहरे हत्याकांड ने समूचे जिले में सनसनी फैला दी।
बदमाश इतने बेखौफ थे कि मुख्य मार्ग पर ही कई राउंड फायरिंग की। इससे गाड़ी तक छलनी हो गई थी। बसपा नेता की हत्या से नागरिकों में आक्रोश भी पनपा था। बड़ी तादाद में नागरिक जिला अस्पताल तक पहुंच गए थे। हालात और ज्यादा बेकाबू न हों, इसलिए पुलिस अधिकारियों को मौके पर मोर्चा संभालना पड़ा था। दोहरे हत्याकांड की ऐसी बड़ी वारदात का गवाह जनपद पहली बार बना था, इसलिए वारदात को लेकर खासी गहमागहमी देखने को मिली।
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दोहरे हत्याकांड की गूंज प्रदेश की राजधानी तक रही। लखनऊ तक से पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल तक पहुंचे। कड़ी सुरक्षा में दोनों शव का पुलिस ने अंतिम संस्कार करवाया। इस मामले में जुरगाम के पुत्र आरिफ उर्फ फरमान ने हरदोई जेल में बंद माफिया सरगना खान मुबारक और उसके अज्ञात साथियों पर केस दर्ज कराया।
इस सनसनीखेज मामले की विवेचना भी पुलिस ने अत्यंत गंभीर अंदाज में की। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तौर पर शामिल कुल 29 व्यक्तियों को विवेचना में आरोपी बनाया। एक-एक कर 27 आरोपियों को या तो गिरफ्तार किया गया या फिर उन्होंने सरेंडर किया। एक फरार आरोपी परवेज को अब पुलिस ने ढेर कर दिया, जबकि उसकी पत्नी रुबीना फरार चल रही है। खास बात यह कि हत्याकांड में पुलिस ने माफिया खान की पत्नी, खान के भाई की पत्नी और खान मुबारक की बहन को भी आरोपी बनाया। इन तीनों ने खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश की, लेकिन दाल नहीं गली। तीनों को जेल जाना ही पड़ा।
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