जलालपुर (अंबेडकरनगर)। शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 22 सितंबर से होने जा रहे हैं। इसे लेकर जलालपुर कस्बे और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्गा पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मूर्तिकारों की कारीगरी, समितियों की सक्रियता और ग्रामीणों की आस्था ने इस बार की नवरात्रि को और भी खास बना दिया है।
जलालपुर क्षेत्र सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक शिल्पकला का प्रमुख केंद्र बन चुका है। दुर्गा पूजा समितियां महीनों पहले से ही मूर्तियों की बुकिंग करा चुकी हैं। पंडाल समितियां बयाना देकर अपने मनचाहे स्वरूप की झांकियों और प्रतिमाओं का ऑर्डर देती हैं। मूर्तियों की कीमत चार हजार से 20 हजार रुपये तक है। इस बार कई समितियों ने आकर्षक झांकियों के साथ विशेष थीम पर आधारित प्रतिमाओं की मांग की है। जलालपुर के साथ-साथ मालीपुर, सुरहूरपुर, पेठिया, भिटौरा, मित्तुपुर, जफराबाद, हाजीपुर, नगपुर, रफीगंज, न्यौरी बाजार जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
पंडाल के लिए भी तैयारियां तेज
दुर्गा पूजा समितियों ने पंडाल निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया है। बांस, बल्लियों, कपड़े, झालरें, लाइटिंग और माइक सिस्टम जैसी सामग्री की खरीद जोरों पर है। इसके साथ ही बाजारों में श्रृंगार सामग्री, पूजा सामान और सजावटी वस्तुओं की बिक्री तेज हो गई है। इससे स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों को सीधा लाभ मिल रहा है।
दूसरी पीढ़ी संभाल रही परंपरा, कारीगरी को मिल रही नई ऊंचाई
जलालपुर निवासी मूर्तिकार राजबली, रामू और रानू प्रजापति बीते चार दशकों से दुर्गा प्रतिमा निर्माण की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। जुलाई माह से कार्य प्रारंभ होता है। पहले कृष्ण जन्माष्टमी की मूर्तियां, फिर दुर्गा प्रतिमाएं और अंत में दीपावली के लिए गणेश-लक्ष्मी प्रतिमाएं तैयार की जाती हैं। प्रजापति परिवार की दूसरी पीढ़ी अब आधुनिक तकनीक और पारंपरिक हस्तकला के संगम से नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है।