अंबेडकरनगर। सरयू नदी इस समय उफान पर है। नदी का जलस्तर हर दिन बढ़ता जा रहा है, जिसके कारण आलापुर और टांडा क्षेत्र के किसानों की चिंताएं और समस्याएं भी बढ़ गई हैं। इस बार नदी की कटान ने सिर्फ खेतों को ही नहीं, बल्कि किसानों की उम्मीदों को भी बहा दिया है। पिछले 15 दिनों में दो दर्जन से अधिक किसानों की ज़मीन सरयू में समा चुकी है, जिससे बाढ़ का खतरा गांवों तक बढ़ने लगा है।
आलापुर तहसील क्षेत्र के कम्हरिया गांव में स्थित धर्मशाला की सीढ़ियों तक सरयू का पानी पहुंच चुका है, जो स्थानीय लोगों में डर और चिंता का माहौल पैदा कर रहा है। वहीं नदी का रुख अब बंधे की ओर हो गया है, जिससे पटपरवा और बद्री का पूरा जैसे गांव खतरे के मुहाने पर खड़े हैं। इन 15 दिनों में ही 20 बीघे से अधिक उपजाऊ खेत नदी की धारा में समा चुके हैं, और गन्ना, बाजरा, तथा धान की लहलहाती फसलें भी बह चुकी हैं। कई किसान तो अपनी अधपकी गन्ने की फसल को समय से पहले काट रहे हैं, ताकि कुछ तो बचाया जा सके। बाढ़ खंड अयोध्या द्वारा नदी के कटान को रोकने के लिए किए गए प्रयास अब तक नाकाफी साबित हो रहे हैं।
इन किसानों के खेत हो चुके समाहित
मांझा कम्हरिया के रामविलास, राम सिंगर, चंद्रभान, हरिराम, कल्लू का पूरा के बब्लू, रामसुख, रामानंद, दिनेश और पटपरवा के पंचराम, श्रीकांत, मंगरु, श्रीराम, राम नाथ, लालचंद, मन्नू, बिहारी, लल्लन, रामलोटन के अलवा इटौरा ढोलीपुर के तालुकदार सिंह, परमात्मा सिंह, राघवेंद्र सिंह के साथ कम्हरिया के सुरेश सिंह, अरविंद सिंह, सोनू सिंह के खेतों कटान में समा चुके हैं।
कुछ स्थानों पर कटान की समस्या
तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव के अनुसार नदी का जलस्तर बढ़ा है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से नीचे है। कुछ स्थानों पर कटान की समस्या है, और इसके समाधान के लिए बाढ़ कार्य खंड अयोध्या ने कार्य शुरू किया है। कटान और बाढ़ की स्थिति की निगरानी के लिए कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
नालों के बाद निचले इलाके के खेतों में भर रहा पानी
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विद्युतनगर। सरयू नदी का जलस्तर शुक्रवार को अयोध्या में 93.24 मीटर दर्ज किया गया, जो कि खतरे के निशान से 51 सेंटीमीटर ऊपर है। इसका असर अब टांडा क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। माझा उल्टहवा क्षेत्र के आसपास के नाले भरने के बाद पानी खेतों में घुसने लगा है, जिससे निचले इलाके के कई खेतों में पानी भर चुका है। माझा उल्टहवा के बाद अन्य गांवों जैसे अवसानपुर, केवटला, डुहियां और महरीपुर में भी ग्रामीणों में भय का माहौल है। एसडीएम टांडा अरविंद त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले सभी गांवों के लेखपालों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।