सरयू नदी का जलस्तर लाल निशान के एकदम करीब पहुंच गया है। रविवार दोपहर बाद से चार घंटे में नदी का पानी लगभग ढाई सेंटीमीटर बढ़ गया। नदी का जलस्तर 92.55 मीटर तक पहुंच गया है। वृद्धि का यही दौर जारी रहा तो सोमवार शाम तक नदी का पानी खतरे के निशान 92.73 मीटर को पार कर सकता है।
इस बीच सरयू के बढ़ते जलस्तर को लेकर मांझा समेत इर्द-गिर्द के लगभग दर्जन भर गांव के लोगों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें बाढ़ का खतरा सताने लगा है। प्रशासन ने हालांकि ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं, सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
बरसात के मौसम में अपनी उफान से ग्रामीणों के बीच खौफ फैलाने वाली सरयू नदी का पानी लाल निशान के काफी करीब पहुंच गया है। सप्ताह भर से नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर बना हुआ था लेकिन शनिवार से नदी के पानी में बढ़ोतरी तेजी से शुरू हो गई। नतीजतन नदी का जलस्तर पिछले एक माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
रविवार सुबह आठ बजे नदी का पानी 92.47 मीटर पर था तो दोपहर 12 बजते-बजते वह 92.53 मीटर पर पहुंच गया। दोपहर के बाद अगले चार घंटे में नदी का पानी ढाई सेमी बढ़ गया। अपराह्न चार बजे जब जलस्तर नापा गया तो वह बढ़कर 92.55 मीटर पर पहुंच गया था।
जलस्तर में इस तरह हो रही वृद्धि ने मांझा क्षेत्र व निकटवर्ती गांव के लोगों में खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि नदी का जलस्तर जिस तरह बढ़ रहा है, उसे देखते हुए सोमवार को दोपहर के बाद किसी भी समय नदी का पानी खतरे के निशान को पार कर सकता है।
लाल निशान को पार करते ही नदी का पानी न सिर्फ मांझा क्षेत्र के गांवों तक पहुंच जाएगा, वरन टांडा नगर के भी कई क्षेत्रों में नालों के जरिये पहुंच सकता है। इसे देखते हुए ही संबंधित क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। मांझा क्षेत्र में रहने वाले प्रभूलाल ने कहा कि नदी का पानी अब कभी भी खतरे के निशान को पार कर सकता है।
उनकी सबसे बड़ी समस्या पशुओं के चारे की है। कलावती व सुमित्रा का कहना था कि सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों की पढ़ाई व खाने-पीने के सामान की हो जाती है। प्रशासन को इस तरफ समय रहते ध्यान देना होगा। ग्रामीण सुखदेव ने प्रशासन से मांग की कि राशन का वितरण अभी से ही सुनिश्चित करा दिया जाए।