कुछ दिनों से लगातार वृद्धि के बाद रविवार को सरयू नदी के जलस्तर में दो सेमी की मामूली कमी हुई। शनिवार को जलस्तर जहां 92.85 मीटर था, वहीं रविवार को 92.83 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान से 10 सेमी ऊपर है। बावजूद इसके निकटवर्ती गांवों के लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
टापू में तब्दील हो चुके माझा उलटहवा के तीन गांवों की दो हजार आबादी के समक्ष आवागमन की समस्या बनी हुई है तो मवेशियों के लिए चारे का संकट भी बना है। सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। सप्ताह भर से जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही थी लेकिन रविवार को इसमें कमी आनी शुरू हो गई।
रविवार शाम चार बजे जलस्तर 92.83 मीटर दर्ज किया गया जो कि लाल निशान से 10 सेमी ऊपर था। शनिवार को जलस्तर खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर 92.85 मीटर पर दर्ज किया गया था। जलस्तर में मामूली कमी होने के बाद भी निकटवर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
टापू बन चुके माझा उलटहवा के तीन गांवों दिलशेर का पूरा, बाबूराम का पूरा व जालिम का पूरा के लोगों को आवागमन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा संबंधित गांवों में मवेशियों के समक्ष चारे का संकट भी खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आवश्यक व्यवस्था कराने की मांग की है।
इसके अलावा निकटवर्ती लगभग डेढ़ दर्जन गांव माझा उलटहवा, माझा डुहिया, माझा अवसानपुर, माझा इस्माइलपुर बेलदहा, माझा चिंतौरा, माझा छज्जापुर व माझा मुबारकपुर आदि के अत्यंत निकट बाढ़ का पानी अभी भी बना हुआ है।
साथ ही नगर के आधा दर्जन मोहल्लों नेहरूनगर, कश्मीरिया नई बस्ती, मेहनिया व छज्जापुर आदि मोहल्लों में भी जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, एसडीएम पंकज ने बताया कि प्रशासन लगातार जलस्तर पर निगाह बनाए हुए है। उन्होंने ग्रामीणों से चिंतित न होने की अपील की है।