अंबेडकरनगर। मोती की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी बढ़ी है। किसान भी मोती की पैदावार के लिए आगे आ रहे हैं। जहांगीरगंज ब्लॉक के तरेम गांव कि प्रगतिशील किसान संतोष सिंह पिछले चार सालों से मोती की खेती कर ठीकठाक मुनाफा कमा रहे हैं। संतोष बताते हैं कि आम लोगों में एक धारणा बनी हुई है कि मोती समुद्र में ही होता है, लेकिन अब तालाब या टैंक में इसकी पैदावार करके डिजाइनर मोती नेचुरल तरीके से हासिल किया जा सकता है। एक सीप में मोती तैयार होने में 12 से 18 महीने लगते हैं। कुछ मोती को तैयार होने में दो से ढाई वर्ष तक भी लग जाते हैं।
किसान संतोष ने उड़ीसा से सीप मंगाकर मोती की पैदावार शुरू की। इसके लिए उन्होंने एक एकड़ में छोटे-छोटे तालाब बनवाए और फिर सीप का वंश तैयार किया। उसके बाद उन्होंने छोटे-छोटे तालाबों में ही मोती की पैदावार शुरू की। मौजूदा समय में वह एक एकड़ में ही मोती की पैदावार करके ठीकठाक मुनाफा कमा रहे हैं। संतोष का कहना है कि एक बिस्वा में भी मोती की पैदावार की जा सकती है। किसान शुरुआत करें, फायदा मिलने पर इसकी पैदावार के लिए आगे आएं और अच्छा मुनाफा कमाएं। (संवाद)
एक अच्छे सीप की कैसे करें पहचान
प्रगतिशील किसान ने बताया कि एक अच्छे मोती के लिए बेहतर सीप का होना जरूरी है। किसान सीप खरीदते समय यह ध्यान रखें कि उसकी लंबाई कम से कम 6 सेंटीमीटर हो। साथ ही उसके ऊपर का चपटा हुआ भाग इंद्रधनुष की तरह दिखना चाहिए और वजन 35 ग्राम से कम नहीं होना चाहिए। एक सीप की सर्जरी में करीब 50 रुपये तक खर्च होते हैं। एक सीप से दो माेती पैदा होते हैं। एक सीप के पौधे से किसान की न्यूनतम आय 200 और अधिकतम 350 रुपये तक हो जाती है। दो से तीन प्रतिशत केस में सीप से लाखों कीमत के मोती पैदा होते हैं। संतोष किसानों को जागरूक करने के लिए 100 गांवों में गोष्ठी करके मोती की पैदावार के तरीकों के बारे में जानकारी दे चुके हैं।