फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambedkar Nagar News: संजीव ने 15 साल पहले जरायम की दुनिया में रखा था कदम

विज्ञापन
संजय उर्फ संजीव निषाद। फाइल फोटो
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। लखनऊ में यूपी एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए एक लाख के इनामी बदमाश संजय उर्फ संजीव निषाद ने वर्ष 2011 में अयोध्या के दिलीप वर्मा के साथ मिलकर ताबड़तोड़ लूट व हत्याएं की थीं। अकबरपुर व महरुआ में वारदात को अंजाम देकर जरायम की दुनिया में अपना डंका बजाया था। करीब 12 साल तक जेल में निरुद्ध रहने के बाद बाहर आया तो फिर से अपराध की दुनिया में सक्रिय होने के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग भी करने लगा।
विज्ञापन

मूलरूप से अहिरौली क्षेत्र के चककोडार गांव का संजय उर्फ संजीव के विरुद्ध अंबेडकरनगर के महरुआ में हत्या, लूट के दो व अकबरपुर में एक मामला दर्ज है। वर्ष 2011 अकबरपुर के महाये भगवानपुर के महेंद्र कुमार की अरिया बाजार में ज्वेलरी की दुकान में लूट के दौरान महेंद्र कुमार को गोली मार दी थी। अस्पताल में महेंद्र की मौत हो गई थी। मृतक के भाई श्याम सुंदर की तहरीर पर संजय निषाद, अनिल और अयोध्या के गोसाईगंज के बधुंहरा सरैंया निवासी दिलीप वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
महरुआ के रामदयाल के बड़े भाई गबड्डू उर्फ विजय प्रताप को वर्ष 2011 में गोली मारी गई थी। रामदयाल की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में दिलीप, अनिल व संजय उर्फ संजीव का नाम सामने आया था। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने तीनों को बरी कर दिया था। इस मामले के आधार पर पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई भी की थी, लेकिन इसमें भी तीनों बरी हो गए थे। इसके अलावा वर्ष 2021 में जेल में भी खूब हंगामा हुआ था। इसमें भी संजीव का नाम आया था और अकबरपुर में प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
विज्ञापन

जेल से रिहा होने के बाद पिछले करीब तीन वर्षों से वह गांव में रह रहा था, हालांकि उसका अधिकांश समय गोसाईगंज क्षेत्र के वंदनपुर स्थित अपनी ससुराल में बीतता था। बताया जा रहा है कि जेल से छूटने के बाद उसने फिर अपराध की दुनिया में जोर आजमाइश शुरू कर दी थी।

गांव में पसरा मातम, पिता व भाई बोले- फंसाया गया
एनकाउंटर की खबर अहिरौली पुलिस ने परिजनों को दी ताे गांव में मातम पसरा गया। पिता हरिराम और भाई राजबब्बर ने कहा कि इस समय प्रॉपर्टी डीलिंग के साथ चीनी मिल में बैगास की ढुलाई का काम कर रहा था। परिजनों का कहना है कि इस समय परिवार के भरण पोषण की ओर ध्यान दे रहा था। 21 अप्रैल को बहन रूपा की शादी में शरीक हुआ था। पिछले 15 दिनों ने संजीव का फोन बंद आ रहा था। उसकी तलाश के प्रयास किए जा रहे थे। आरोप है कि संजीव को इस हत्याकांड में झूठा फंसाया गया है।
पत्नी व पांच बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
संजीव चार भाइयों में दूसरे नंबर का था। बड़े भाई सत्यजीत घोड़ा-बग्घी चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। तीसरे भाई रमेश पंजाब में रहते हैं, जबकि सबसे छोटा भाई राजबब्बर गांव में मीट की दुकान चलाते हैं। उसके पिता हरिराम लंबे समय से बीमार हैं और बेटे की आपराधिक गतिविधियों को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। संजीव के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे अमरेश (25), शिवा (19) और राज (18) तथा दो बेटियां ब्यूटी (17) और सृष्टि (14) हैं। मुठभेड़ में संजीव की मौत की खबर मिलने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं गांव में भी मातम का माहौल है।
टांडा से ब्लॉक प्रमुख बनने की जुगत में माफिया दिलीप
अंबेडकरनगर। अयोध्या के गोसाईगंज के बधुंहरा सरैंया का दिलीप वर्मा पेशेवर अपराधी है। अंबेडकरनगर, अयोध्या समेत कई जिलों में इसके खिलाफ तमाम मामले दर्ज हैं। लखनऊ में एनकाउंटर में मारा गया संजीव इसके गिरोह का सदस्य था और दोनों ने मिलकर कई वारदात को अंजाम दिया था। इन दिनों माफिया दिलीप सफेदपोश भाजपा नेताओं के आसपास अधिक देखा जा रहा है। दिलीप वर्मा पंचायत चुनाव में टांडा से ब्लॉक प्रमुख बनने की जुगत में है। यही वजह है कि हाल ही में दिलीप वर्मा ने नवघोषित जिलाध्यक्ष दिलीप पटेल देव के स्वागत में लखनऊ से अंबेडकरनगर तक खूब दौड़ लगाई, जिसके फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसके अलावा कई बड़े नेताओं के साथ भी फोटो सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें