यहां जलालपुर नगर पालिका परिषद में सभासदों व कई धनवान लोगों की पेंशन बना दिए जाने के मामले में निचलेस्तर तक के कर्मचारियों पर तो गाज गिर गई, लेकिन जिन अधिशाषी अधिकारी नगर परिषद के विरुद्ध शासन को निलंबन की संस्तुति की गई थी, उस पर अब तक शासन कोई संज्ञान नहीं ले सका है।
प्रदेश सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना के तहत जिले के विभिन्न विकास खंडों में पात्रों का चयन किया गया। इसके सत्यापन का कार्य भी पूर्ण कर अंतिम सूची तैयार कर दी गई। इसी बीच जलालपुर विकास खंड में योजना के तहत चयनित किए गए पात्रों में व्यापक मनमानी की शिकायतें सामने आने लगीं।
अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। योजना के तहत तमाम नौकरी पेशा, सभासद व धनवान लोगों का भी चयन कर उनका सत्यापन कर दिया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम विवेक ने मजिस्ट्रेटी जांच बैठा दी।
विकास खंड के छाछू मोहल्ला, गंजा व जाफराबाद के चयनित पात्रों का जब पुन: सत्यापन हुआ, तो इसमें बड़ी धांधली सामने आई। इस पर डीएम के निर्देश पर नगर पालिका परिषद में कार्यरत तीन सफाईकर्मियों को निलंबित कर दिया गया, जबकि ईओ नगर पालिका परिषद मंजूर अहमद के निलंबन की संस्तुति के लिए शासन को पत्र लिखा।
शासन की इस महत्वपूर्ण योजना में धांधली सामने आने के बाद इसके दोषियों में निचलेस्तर के कर्मचारियों पर तो कार्रवाई कर दी गई, लेकिन ईओ के विरुद्ध लगभग वर्ष बीतने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी योजनाओं का पात्रों को समुचित लाभ उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अधिकारी कितना गंभीर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता डा. रमाकांत मिश्र कहते हैं कि जब महत्वाकांक्षी योजना का यह हाल है, तो अन्य का क्या होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
निचलेस्तर के कर्मचारियों के साथ साथ यदि उच्चाधिकारियों पर भी तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए ,तो भ्रष्टाचार पर काफी हद तक अंकुश पाया जा सकता है और फिर योजनाओं का पात्रों को समुचित लाभ भी दिलाया जा सकता है।