केदारनगर। टांडा विकासखंड का राजस्व गांव नारायणपुर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी के कारण यह गांव विकास की दौड़ में पिछड़ गया है। लगभग 80 परिवारों वाले इस गांव में एक भी बरात घर या सामुदायिक भवन नहीं है, जिससे ग्रामीणों को सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
गांव में सरकारी भवन के नाम पर केवल एक 50 साल पुराना प्राथमिक विद्यालय है। विडंबना यह है कि यह स्कूल भी गांव की सीमा में न होकर पड़ोसी गांव अतरौरा में स्थित है। जिससे छोटे बच्चों को काफी दूर पैदल जाना पड़ता है। इसके अलावा, गांव की नालियां और सड़कें बदहाल हैं, जो ग्रामीणों की रोजमर्रा की परेशानी का कारण बनी हुई हैं।
स्थानीय निवासी जाफर अली और राजेश गुप्ता ने बताया कि सुविधाओं के अभाव में उन्हें शादी-ब्याह के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है। वहीं, इदरीश और विकास गुप्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय नेता वादे तो बहुत करते हैं, लेकिन जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता। ग्राम पंचायत अधिकारी विक्रम सागर ने बताया कि नारायणपुर गांव में बरात घर और सामुदायिक भवन के निर्माण का प्रस्ताव (अधियाचन) शासन को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा और गांव की अन्य समस्याओं का भी समाधान किया जाएगा।