अंबेडकरनगर। सरकारी काम में पैसा लगेगा, बिना चढ़ावा कुछ नहीं होगा, जलालपुर तहसील में शायद यही सोच राजस्व निरीक्षक भुवन प्रताप की थी। बृहस्पतिवार को एंटी करप्शन टीम ने उसे सात हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। इससे पूरे तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। 40 दिन में घूसखोरी का यह दूसरा मामला तहसील में पकड़ा गया है।
शिकायतकर्ता विपिन मौर्य निवासी उसरहा ने बताया कि उनका मामला धारा 24 पत्थरनसब (भूमि विवाद) के तहत विचाराधीन है। राजस्व निरीक्षक भुवन प्रताप ने मामले की कार्रवाई के बदले सात हजार रुपये की घूस मांग की थी। पैसे देने में असमर्थता जताने के बाद भी राजस्व निरीक्षक मानने को तैयार नहीं था। इस पर विपिन मौर्य ने एंटी करप्शन विभाग अयोध्या से शिकायत की थी।
टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दोपहर करीब तीन बजे जलालपुर तहसील परिसर में ही निरीक्षक को रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। निरीक्षक ने तहसील की दूसरी मंजिल पर विपिन को बुलाकर रिश्वत ली थी। इसके बाद दोनों तहसील के पीछे लेखपाल कक्ष संघ के पास पहुंचे, यहीं से टीम ने उसे उठा लिया। जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक टीम राजस्व निरीक्षक को गिरफ्त में लेकर वहां से निकल पड़ी।
इसके बाद कोतवाली अकबरपुर पहुंचकर मामले में लिखापढ़ी शुरू की। देर शाम को मुकदमा दर्ज कराने के बाद टीम राजस्व निरीक्षक को लेकर रवाना हो गई। इस कार्रवाई से तहसील परिसर में खलबली मच गई। एसडीएम राहुल गुप्ता ने बताया कि लिखित सूचना मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कानपुर से जलालपुर तक का सफर
भुवन प्रताप कानपुर के मूल निवासी है और बीते चार वर्षों से जलालपुर में राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनात था। उसका कार्यक्षेत्र मालीपुर हल्का था और वह सरकारी आवास में अपनी पत्नी के साथ रहता था।
नहीं बाज आ रहे जिम्मेदार
चौंकाने वाली बात यह है कि महज 40 दिन पहले 31 मई को इसी तहसील में तैनात लेखपाल अरुण यादव को भी एंटी करप्शन टीम ने घूस लेते हुए गिरफ्तार किया था। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या भ्रष्टाचार तहसीलों में नियम बनता जा रहा है।