शहर के तमसा तट प्रागंण में बृहस्पतिवार देर शाम श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करते श्रद्धालु
अंबेडकरनगर। शहर के तमसा तट प्रांगण में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार को गो संरक्षण, मानव मूल्यों और आत्मिक सुधार का वर्णन किया गया।
प्रवाचक साध्वी भाग्यश्री भारती ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन में अनेक आदर्श स्थापित किए, मगर वर्तमान समाज में उनके सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने की कमी दिखती है। जब लोग स्वयं को कृष्ण का भक्त मानते हैं, तो उनके विचारों और शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का प्रयास क्यों नहीं करते। इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन उसका अपना मन होता है। काम, क्रोध और लोभ पर नियंत्रण ही सच्ची जीत है। बदलाव बाहर नहीं, अंदर से शुरू होता है। सही ज्ञान जीवन की दिशा बदल सकता है।यदि समाज ने वास्तव में इन सिद्धांतों को अपनाया होता, तब देश में गोवंश की स्थिति बेहतर होती। भारत की परंपरा में गाय को विशेष स्थान दिया गया है, लेकिन वर्तमान समय में उसकी उपेक्षा चिंता का विषय है। संस्थान की ओर से चलाए जा रहे ‘कामधेनु’ प्रकल्प का उल्लेख करते हुए बताया गया कि इसके अंतर्गत विभिन्न गोशालाओं में देसी नस्ल की गायों के संरक्षण, संवर्धन और नस्ल सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।