अंबेडकरनगर। सरकारी अस्पताल में स्टाफ नर्स को उच्च वेतन के बावजूद प्रसव सेवाओं में लापरवाही बरतने का मामला सामने आया है। सीएचसी अकबरपुर में तैनात दो सहायक नर्सिंग मिडवाइफ (स्टाफ नर्स) ने सरकार की ओर से निर्धारित वेतन के बावजूद केवल 17 प्रसव कराए, जबकि वेतन लगभग 14.62 लाख रुपये लिया गया। इस मामले की जांच सीएमओ ने डीएम के आदेश पर की। जिसमें गंभीर अनियमितताएं सामने आईं हैं। लापरवाही उजागर होने पर दोनों स्टाफ नर्स को स्थानांतरित कर दिया गया है।
दरअसल, सीएचसी अकबरपुर के डिलीवरी पाइंट पर मानक के अनुसार प्रसव की संख्या कम होने के कारण यूपीआईएचडी हेल्थ इंडिकेटर की रैंकिंग में गिरावट आई है। इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने 1 जुलाई 2025 को स्टाफ नर्स ऊषा गौतम, वंदना, ओमवती और अन्य कर्मचारियों के कार्यों की जांच की। जिसमें गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद 23 जुलाई को सीएचसी अकबरपुर से संबंधित प्रसव एवं वितरण संबंधी समस्त रिकार्ड की दोबारा जांच हुई। जांच में पाया गया कि उषा गौतम ने छह महीने 20 दिन में 9 लाख रुपये से अधिक का वेतन लिया, लेकिन उन्होंने केवल पांच प्रसव कराए। इसका मतलब है कि प्रति प्रसव सरकार को 1.84 लाख रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, वंदना ने 5.41 लाख रुपये का वेतन लिया, लेकिन उन्होंने सिर्फ 12 प्रसव कराए। जिनमें प्रति प्रसव 45,104 रुपये खर्च हुए। इस लापरवाही के बाद सीएमओ ने दोनों स्टाफ नर्स को स्थानांतरित कर दिया। उषा गौतम को जहां बीटी (बीएचटी) कर दिया गया, वहीं वंदना का तबादला राजेसुल्तानपुर में किया गया।
सीएमओ का बयान
सीएचसी में तैनात स्टाफ नर्स की ओर से प्रसव सेवाओं में ध्यान नहीं दिया गया। वेतन के हिसाब से काम नहीं किया गया और घोर लापरवाही बरती गई। दोनों नर्सों को सीएचसी से स्थानांतरित कर दिया गया है।
- डॉ. संजय कुमार शैवाल, सीएमओ