अस्पतालों व स्कूलों समेत आंगनबाड़ी केंद्रों आदि में मनमानी रोकने के लिए शासन के निर्देश पर शुक्रवार सुबह सभी पांच तहसीलों में एसडीएम ने औचक निरीक्षण अभियान चलाया। इसमें शिक्षकों व आंगनबाड़ी कर्मचारियों से लेकर चिकित्सकों तक की भारी मनमानी सामने आई। हद यह कि रामनगर पीएचसी का ताला निर्धारित अवधि के बाद भी लटका देख एसडीएम आलापुर को लौटना पड़ा।
लगभग एक घंटे बाद वे फिर से पहुंचे तो भी कई चिकित्सक व कर्मचारी नदारद थे। गौरतलब है कि सभी सरकारी संस्थाओं व कार्यालयों में समय से शत-प्रतिशत उपस्थिति तय करने का निर्देश बीते दिनों मुख्य सचिव ने दिया है।
डीएम विवेक ने शुक्रवार सुबह सभी पांच तहसीलों के एसडीएम को निर्देशित किया कि वे अस्पतालों, विद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों आदि का औचक निरीक्षण करें। सभी एसडीएम निरीक्षण पर निकले तो कर्मचारियों की मनमानी की पोल खुल गई। एसडीएम विनय गुप्त शुक्रवार सुबह आठ बजकर सात मिनट पर रामनगर पीएचसी पहुंचे तो वहां ताला लटका हुआ था।
कुछ देर रुकने के बाद भी उन्हें चिकित्सालय खोलने को कोई कर्मचारी या चिकित्सक नजर नहीं आया तो वे आगे बढ़ गए। एक घंटे बाद वे फिर से लौटे तो भी कई चिकित्सक व कर्मचारी नदारद थे। एसडीएम आलापुर को निरीक्षण में कई खामियां मिलीं। एक स्टाफ नर्स का हस्ताक्षर फर्जी पाया गया।
एसडीएम ने बताया कि लिपिक अरविंद मिश्र व लैब टेक्नीशियन विनोद कुमार का हस्ताक्षर 17 से 19 अगस्त तक किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा बनाया गया था। जेनरेटर के बारे में पूछने पर सीएचसी प्रभारी डॉ. उदयचंद्र यादव ने बताया कि डीजल नहीं है। ड्यूटी रोस्टर भी नहीं मिला। अकबरपुर तहसील में एसडीएम खुद तो नहीं निकले लेकिन उन्होंने कर्मचारियों को भेजकर निरीक्षण करवाया।
एसडीएम भीटी रमापति ने सीएचसी का औचक निरीक्षण किया तो वहां प्रभारी जयसिंह भारती समेत छह चिकित्सक गैरहाजिर मिले। स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी दिलीप समेत कुल छह कर्मचारी नदारद थे। एसडीएम ने खजुरी आंगनबाड़ी केंद्र का जायजा लिया तो सहायिका अनीता वर्मा नदारद थीं। प्राथमिक विद्यालय टेमा में अनुदेशक सविता व संदीप नहीं मिले।
उधर, एसडीएम विवेक मिश्र ने सीएचसी जलालपुर व भियांव का निरीक्षण किया। भियांव में डॉ. अभिषेक सिंह तो जलालपुर में दो कर्मचारी गैरहाजिर मिले। टांडा तहसील में हुए एसडीएम के निरीक्षण में भी सीएचसी टांडा में चार चिकित्सक गैरहाजिर मिले। डीएम विवेक ने बताया कि सभी एसडीएम से जांच रिपोर्ट मांगी गई है।
उन्हें संकलित कर शासन को भेजा जाएगा। यह अभियान अब जिले में नियमित रूप से चलेगा। सभी सरकारी कार्यालयों में समय से शत-प्रतिशत उपस्थिति तय की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कार्यालयों में आम लोगों की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर तय हो।