अंबेडकरनगर। दोहरे हत्याकांड को लेकर जिले के दो अलग-अलग स्थानों पर हुई मुठभेड़ में एसटीएफ के शामिल होने को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों का कहना है कि जब नतीजा एक जैसा ही सामने आना था, तो फिर एसटीएफ जैसे तेजतर्रार पुलिस कर्मियों की टीम को शामिल किए जाने का औचित्य ही क्या था।
सूत्रों के अनुसार राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र में मुठभेड़ से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। इसे देखते हुए ही पुलिस की कई कार्ययोजना में अचानक तब्दीली आ गई। नागेंद्र पांडेय की मुठभेड़ में गिरफ्तारी के बाद लगा कि मुख्य आरोपी अमित पकड़ में नहीं आया, लेकिन कुछ देर बाद ही यह खबर सामने आ गई कि उसे एसटीएफ ने बेवाना या भीटी थाना क्षेत्र में घेर लिया है। इससे बड़े एनकाउंटर के कयास लगाए जाने लगे। चूंकि नागेंद्र के साथ हुए एनकाउंटर में एसटीएफ शामिल नहीं थी, इसलिए जिस दूसरे एनकाउंटर में एसटीएफ शामिल थी, उसके नतीजे बदलने की चर्चाएं जिले में जोरशोर से सामने आने लगी थीं।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार अरसे बाद एसटीएफ ने जिले के ऐसे किसी प्रकरण में हाथ डाला था, लेकिन इसके बावजूद यह एनकाउंटर भी जनपद में अब तक हुए पुलिस के रटे रटाए व परंपरागत एनकाउंटर जैसे ही निकले। इससे एसटीएफ की कार्य प्रणाली व उसके यहां आने के औचित्य और नतीजों को लेकर बहस का सिलसिला शुरू हो गया है। चर्चा यह भी है कि एनकाउंटर की यह घटना अंत समय में कहीं किसी हस्तक्षेप या दबाव का शिकार तो नहीं हो गई।