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क्रय केंद्र सन्नाटे में डूबे, बाजार किसानों से चहके

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अंबेडकरनगर। सरकार द्वारा घोषित 2015 रुपए प्रति कुंतल समर्थन मूल्य पर गेहूं की बिक्री किसानों को रास नहीं आ रही। इसके चलते ही जहां सरकारी खरीद के लिए चिह्नित खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा दिख रहा है वहीं खुले बाजार में आढ़तियों के यहां गेहूं बेचने को किसानों की भीड़ जुट रही है। हालांकि आढ़ती निर्धारित मूल्य से कम पर ही गेहूं की खरीद कर रहे हैं, इसके बावजूद किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने में होने वाली परेशानी व अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए आढ़ती के हाथों ही अपनी उपज बेचना ज्यादा मुनासिब समझ रहे हैं।
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शासन स्तर से जिले में गेहूं की सरकारी खरीद के लिए 69 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों को 65 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया है। खरीद शुरू होने के 15 दिन बीत जाने के बावजूद गेहूं की सरकारी खरीद का आंकड़ा अभी तक सिर्फ 222.40 कुंतल तक ही पहुंचा है। इससे साफ होता है कि किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री में दिलचस्पी नही दिखा रहे हैं। किसानों को उत्पादन का वाजिब मूल्य देने के लिए सरकार ने इस बार गत वर्ष के मुकाबले समर्थन मूल्य 40 रुपया प्रति कुंतल की वृद्धि की गयी। इसके बाद भी गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर किसान उदासीन बने हैं।
किसानों का कहना है कि खुले बाजार में उन्हें उपज का समुचित दाम मिल जा रहा है। सरकारी खरीद केंद्र पर उपज पहुंचाने में सौ रुपया प्रति कुंतल का अतिरिक्त खर्च आता है। इतना ही नहीं तौल से लेकर बिक्री के लिए टोकन लेकर लाइन में लगने की परेशानी अलग होती है। ऐसे में खुली बाजार में समर्थन मूल्य से कुछ कम मिलने पर भी गेहूं की बिक्री करने पर कोई खास नुकसान नहीं होता। इसी कारण आढ़तियों के यहां गेहूं बेचने के लिए किसानों की भीड़ जुट रही है।
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अकबरपुर के किसान प्रदीप वर्मा व अजय सिंह ने बताया कि सरकार का समर्थन मूल्य कम है। ऐसे में किसान सरकारी क्रय केन्द्रों पर गेहूं बेचने में दिलचस्पी नही ले रहे हैं। क्रय केन्द्र पर एक दिन में तौल होगी या फिर अगल कई दिन तक इंतजार करना पड़ेगा इसमें भी संशय रहता है। ऐसे में वाहन भाड़ा भी बढ़ जाता है। ऐसे में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने में आने वाले खर्चों को हटाने के बाद उन्हें 1850 रुपया प्रति कुंतल का मूल्य ही मिल पाएगा। ऐसे में आढ़ती अगर उनके घर आकर 1900 से 2000 रुपया प्रति कुंतल की दर से गेहूं की नकद खरीद कर रहा है तो फिर सरकारी क्रय केन्द्रों के चक्कर क्यों लगाए जाए।
जिले में गेहूं कटाई व मड़ाई का कार्य अभी तेजी से चल रहा है। आने वाले समय में किसान सरकारी क्रय केन्द्रों पर बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। किसानों को गेहूं की बिक्री पर भुगतान के लिए किसी प्रकार की दिक्कत नही होगी।
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राजेश कुमार खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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