अंबेडकरनगर। अपराध नियंत्रण और अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया (कन्विक्शन रेट) को और पुख्ता करने के लिए यूपी पुलिस ने एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब डायल 112 की पीआरवी (पायलट रिस्पांस व्हीकल) न केवल घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचेगी, बल्कि स्थानीय पुलिस के आने तक क्राइम सीन को पूरी तरह सुरक्षित करने की जिम्मेदारी भी उसी की होगी।
जिले में 30 से अधिक पीआरवी चार पहिया वाहन हैं। अक्सर देखा गया है कि किसी वारदात के बाद पुलिस के पहुंचने से पहले ही लोग घटनास्थल पर पहुंच जाते हैं। इससे फिंगर प्रिंट्स, फुट प्रिंट्स और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर, पीआरवी कर्मियों को अब घटनास्थल की घेराबंदी करनी होगी। ताकि फॉरेंसिक टीम को साक्ष्य अपने मूल स्वरूप में मिल सके।
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पीआरवी कर्मियों को मिली विशेष ट्रेनिंग-
इस नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए पीआरवी पर तैनात पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा चुका है। घटनास्थल के चारों ओर येलो टेप का प्रयोग कर सुरक्षा घेरा बनाना होगा। पीआरवी कर्मी स्थानीय पुलिस के आने से पहले मोबाइल के जरिए घटनास्थल की प्रारंभिक स्थिति को दर्ज करेंगे।
अब अपराधी बच नहीं पाएंगे
अपराध स्थल को सुरक्षित करना केस की सफलता की पहली सीढ़ी है। पीआरवी कर्मियों की सजगता से अब विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व बढ़ेगा और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी। अब एक भी अपराधी साक्ष्य अभाव में नहीं बच पाएगा।
हरेंद्र कुमार, एएसपी