फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गांवों को 14 घंटे बिजली का वादा हवाहवाई!

Wed, 16 Mar 2016 10:36 PM IST
अमरउजाला ब्यूरो
विज्ञापन
इन जर्जर उपकेंद्रों से गांवों को कैसे दी जाएगी बिजली। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
गर्मी के निकट आते ही बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए एक दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समाजवादी विकास दिवस के अवसर पर शहरी क्षेत्र को 20 घंटा व ग्रामीण क्षेत्रों को 14 घंटे की बिजली दिए जाने की घोषणा की थी।
विज्ञापन


अब तक ग्रामीण क्षेत्रों को 10 घंटे व शहरी क्षेत्रों को 15 घंटे की विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल था। मुख्यमंत्री की घोषणा का विद्युत उपभोक्ताओं ने बढ़ चढ़कर स्वागत किया था। सबसे अधिक खुशी किसानों व पावरलूम संचालकों को हुई पर अनवरत 14 घंटे  विद्युत आपूर्ति उपलब्ध होने को लेकर संशय का माहौल है।

कारण यह कि जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित लगभग सभी विद्युत उपकेंद्रों में स्थापित ज्यादातर फीडर या तो ओवरलोड हैं या फिर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इसके अलावा जर्जर भी तार आए टूटते रहते है।
विज्ञापन


जर्जर तारों को बदलने, ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाए जाने एवं उपकेंद्रों में स्थापित फीडरों की दशा में सुधार करने और फीडरों की संख्या बढ़ाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस तरफ कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। नतीजतन जिले में बिजली व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुक ी है।

अकबरपुर विद्युत उपकेंद्र में सात फीडरों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है। यहां दो फीडर बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। भीटी में वर्ष 2007 में विद्युत उपकेंद्र की स्थापना की गई थी। यहां 4 फीडर से विद्युत आपूर्ति की जा रही है, जबकि एक फीडर को बढ़ाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।

इसी प्रकार कटेहरी विद्युत उपकेंद्र, जलालपुर विद्युत उपकेंद्र, रामनगर विद्युत उपकेंद्र, टांडा विद्युत उपकेंद्र सहित लगभग सभी विद्युत केंद्रों में फीडरों की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से जर्जर तार बदले जाने की तरफ ध्यान नहीं दिया जा सका है। नतीजा यह है कि गर्मी बढने पर अक्सर तार टूटने की घटना सामने आती रहती है। ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाए जाने की जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों में है। एक अनुमान के मुताबिक 70 प्रतिशत से अधिक ट्रांसफार्मर ओवरलोडेड हैं।
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें