अंबेडकरनगर। राज्य सरकार की तमाम प्राथमिकताओं के बावजूद आम फरियादियों को अभी भी एड़ियां रगड़नी पड़ रही हैं। वर्षों से अपनी समस्या से लेकर कार्यालयों का चक्कर लगाते आ रहे पीड़ितों के लिए हालात अभी भी जस के तस हैं। उनके लिए इसका कोई मतलब नहीं रह गया है कि व्यवस्था बदल गई है या फिर सरकार की तरफ से तमाम सख्ती की जा रही है। लगातार भटक रहे ऐसे फरियादियों का यही कहना है कि सिस्टम अभी भी हम सब के लिए न्याय से कोसों दूर जैसा है।
अमर उजाला टीम ने गुरुवार को जिला मुख्यालय स्थित अलग-अलग कार्यालयों का जायजा लिया। कई फरियादी ऐसे मिले जो कई कई वर्ष से अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर लगाते चले आ रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। किसी को पेंशन की जरूरत तो किसी को सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भूमि विवाद के मामलों में सुनवाई तेजी से न होने की आम समस्या से तमाम ग्रामीण प्रभावित दिखायी दिए। पेश है अलग-अलग कार्यालयों में मिले पीड़ितों से बातचीत के अंश-
अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के उम्मरपुर गांव निवासी रामचरन वर्ष 2016 से अपर जिलाधिकारी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। बताया कि एडीएम कोर्ट में भूमि बंटवारे का मामला विचाराधीन है। मामले में जल्द निर्णय न होने से वह परेशान हैं। लगभग 12 बिस्वा भूमि के लिए उन्हें इस बुढ़ापे में कार्यालय का चक्कर काटना पड़ रहा है। मामले में कमिश्नर द्वारा आदेश भी दिया गया, लेकिन अब तक निस्तारण नहीं हो सका है। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि समय की भी बर्बादी हो रही है।
महरुआ थाना क्षेत्र के पीठापुर निवासी जयनरायण अपनी बहू प्रेमलता की विधवा पेंशन बनवाने के लिए बीते 8 माह से समाज कल्याण विभाग का चक्कर काट रहे हैं। बताया कि बेटे की मौत से परिवार पहले ही टूट चुका है। सोचा बहू के नाम से पेंशन बनवा दूं, जिससे कुछ पैसा मिल जाएगा, जिससे घर का खर्च चलने में थोड़ी आसानी होगी। बहू के दो बच्चे भी हैं। उनके पालन पोषण की बड़ी चुनौती है। पेंशन बनवाने के लिए कई बार ग्राम प्रधान व सचिव से मिन्नतें की, लेकिन नहीं बन सका। सोचा जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों से गुहार लगाऊं, लेकिन यहां भी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही हैं।
कृषि विभाग कार्यालय में मिले कटेहरी निवासी अशोक कुमार व अन्नावां निवासी राजितराम किसान सम्मान निधि का लाभ न मिलने से खासे परेशान हैं। अशोक के मुताबिक, उन्होंने सम्मान निधि के लिए आवेदन किया था। दो किस्त का भुगतान शासन से हुआ, लेकिन गलत खाता संख्या फीड होने की वजह से उसे लाभ नहीं मिला। इस गड़बड़ी को करीब 6 माह पहले उसने दुरुस्त कराया, लेकिन अब तक लाभ नहीं मिल सका। जबकि राजितराम का कहना था कि एक वर्ष से वह कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। विभागीय कर्मचारी न तो आवेदन में कोई गड़बड़ी बताते हैं, और न ही योजना का लाभ दे रहे हैं। कार्यालय आने पर कहा जाता है कि अब की बार खाते में पैसा जाएगा।
अकबरपुर तहसील में मिले अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के मरैला निवासी अवधेश कुमार लगभग आठ वर्ष से उपजिलाधिकरी कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। बताया कि करीब डेढ़ बीघे भूमि के विवाद का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। विपक्षी की अपील इसके पहले जूनियर डिविजन में खारिज हो चुकी है। इसके बावजूद एसडीएम न्यायालय से उन्हें राहत नहीं मिल रही है। प्रत्येक माह तारीख लग रही है। वह फैसले की उम्मीद में तहसील आते हैं। कभी साहब नहीं बैठते तो कभी अन्य कारणों से सुनवाई ही नहीं हो पा रही है।
आम नागरिकों का दर्द दूर करने के सभी प्रयास प्रशासन के अलग अलग स्तरों से किए जा रहे हैं। उन्हें राहत मिल रही है। सभी योजनाओं का लाभ सत्र प्रतिशत पात्रों को मिले यह सुनिश्चित करने का भी काम प्रतिदिन चल रहा है। लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई भी हो रही है। कार्यालयों में आने वाले प्रार्थना पत्र की सुनवाई समयबद्घ ढंग से हो इसकी भी समीक्षा की जा रही है।
- राकेश कुमार मिश्र, जिलाधिकारी