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Ambedkar Nagar News: जेल के बाथरूम में गमछे से लटका मिला बंदी का शव

Thu, 18 Dec 2025 12:40 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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राजकीय मेडिकल कॉलेज ​स्थित पोस्टमार्टम हाउस में मृतक सुशील तिवारी के पिता से वार्ता करते सीओ टा
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अंबेडकरनगर। जानलेवा हमले के मामले में 36 दिन से जिला कारागार में निरुद्ध सुशील तिवारी उर्फ ज्ञानू (30) का शव बुधवार भोर करीब सवा चार बजे जेल के बाथरूम में गमछे के फंदे से लटकता मिला। घटना की जानकारी होते ही जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में शव को फंदे से उतरवाकर राजकीय मेडिकल कॉलेज की मर्चरी भिजवाया गया।
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भीटी थाना क्षेत्र के ग्राम बेनीपुर निवासी सुशील तिवारी, सेवानिवृत्त फौजी अशोक तिवारी का पुत्र था और 11 नवंबर से जिला कारागार में निरुद्ध था। 22 अक्तूबर की शाम उसका अपने मित्र विकास दुबे से 20 हजार रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद हो गया था। मारपीट के दौरान बांके के प्रहार से विकास घायल हो गया था। इस मामले में पुलिस ने सुशील सहित उसके माता-पिता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और करीब 20 दिन बाद सुशील को गिरफ्तार किया गया था।
परिजनों के अनुसार, सुशील मानसिक बीमारी से भी पीड़ित था और उसका इलाज चल रहा था। मंगलवार को परिजन उससे मुलाकात करने जेल गए थे, जहां उसने मानसिक रूप से परेशान होने की बात कही थी। बुधवार की सुबह वह हाता नंबर तीन की बैरक नंबर 18 से बाथरूम गया था। कुछ देर बाद दूसरे बंदी ने शव फंदे से लटकता देखा और शोर मचाया। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को उतरवाकर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
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मृतक के पिता अशोक तिवारी ने भीटी पुलिस पर एक लाख रुपये लेकर उनका और उनकी पत्नी का नाम मुकदमे से निकालने का आरोप लगाया है। साथ ही जेल प्रशासन पर प्रताड़ना के भी आरोप लगाए हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि आत्महत्या की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है।



पांच घंटे बाद मिली बुजुर्ग माता-पिता को बेटे की मौत की सूचना
फोन पर नहीं दी गई जानकारी, घर भेजे गए पत्र से चला पता

आज दाखिल होनी थी जमानत याचिका, अदालत में लगी थी सुनवाई
फोटो–07 व 08

संवाद न्यूज एजेंसी

अंबेडकरनगर। जिला कारागार में निरुद्ध सुशील तिवारी की मौत की सूचना उसके बुजुर्ग माता-पिता को करीब पांच घंटे तक नहीं दी गई। एक रिश्तेदार से तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने पर पिता अशोक तिवारी और मां मालती देवी बेटे की सलामती की प्रार्थना करते हुए जिला अस्पताल पहुंचे और करीब आधे घंटे तक इमरजेंसी, ओपीडी व वार्डों में भटकते रहे।

जेल प्रशासन की ओर से सुबह करीब दस बजे घर पर एक पत्र भेजकर मौत की सूचना दी गई। जानकारी मिलते ही दंपती के होश उड़ गए। वे तत्काल राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, जहां बेटे को देखने की अनुमति के लिए काफी देर तक आग्रह करते रहे। बताया गया कि बुधवार को सुशील की जमानत याचिका सत्र न्यायालय में दाखिल होनी थी। इसके लिए पिता सुबह अधिवक्ता शशिकांत तिवारी से मिले भी थे। साथ ही विपक्षी विकास दुबे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने संबंधी याचिका पर जेडी/एफटीसी-जेएम न्यायालय में सुनवाई भी निर्धारित थी, जिसमें अब 20 दिसंबर की तारीख लगाई गई है।
थाने पर की शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
पिता अशोक तिवारी के अनुसार, घटना के समय वह पत्नी के साथ एक अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे। मारपीट के दौरान बांके से किए गए प्रहार से बचने के प्रयास में विकास घायल हुआ था, जबकि सुशील को भी चोटें आई थीं। इसके बावजूद थाना प्रभारी अमित कुमार पांडेय ने विपक्षियों से सांठगांठ कर एकतरफा प्राथमिकी दर्ज की। उनके द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सेना में तैनात हैं मृतक के दो भाई
मृतक सुशील के पिता अशोक तिवारी वर्ष 2006 में भारतीय सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनका बड़ा पुत्र सुनील तिवारी लद्दाख और मंझिला पुत्र अनिल तिवारी असम में भारतीय सेना में तैनात हैं। सुशील की शादी वर्ष 2016 में दीपमाला से हुई थी और उनका आठ वर्षीय पुत्र शौर्य तिवारी है। घटना के बाद से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।


पूर्व में कोई शिकायत नहीं की गई
सुशील के पिता द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में पूर्व में कोई शिकायत नहीं की गई थी। प्राथमिकी में नाम शामिल किए जाने के मामले में विवेचना चल रही थी, इसी कारण केवल सुशील की गिरफ्तारी की गई थी। पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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— अभिजीत आर. शंकर, पुलिस अधीक्षक
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