कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अरहर की बजाए मटर व चने की दाल का प्रयोग करना शुरू कर दिया है। अरहर की दाल की बिक्री घटने से जिला मुख्यालय स्थित मंडी में तमाम दुकानदार भी बेचैन हैं। विक्री घटने से उनकी व्यवसायिक लागत फंसी हुई है।
दालों के दामों में बढ़ोतरी ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। पिछले कुछ समय से दाल के दाम में जिस प्रकार से तेजी आयी है, उसने लोगों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। घरों में पहले से खरीद कर रखी गई दाल के बूते तो अधिकांश लोगों ने अब तक काम चला लिया, लेकिन अब दाल की खरीददारी करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
कारण यह कि दाल के दाम में प्रतिकिलो 50 से 75 रुपए तक की वृद्धि हो गई है। आम लोगों के लिए यह बढ़ोतरी कमर तोड़ने वाली है। बाजार में जाने के बाद उपभोक्ताओं को अब दाल खरीदने में पसीने छूटने जैसी स्थिति है। अरहर व उड़द की दाल में सबसे ज्यादा वृद्धि हुई है। नतीजा यह है कि इन दालों की बिक्री पर भी सीधा असर पड़ा है।
इससे एक तरफ जहां दुकानदारों का रोजगार प्रभावित हुआ है, वहीं थाली में दाल की मात्रा भी घटी है। चौक शहजादपुर में दाल का कारोबार करने वाले जलालुद्दीन बताते हैं कि महंगाई का ही असर है कि अब तमाम लोग मिक्स दाल खरीदने लगे हैं। चना व मटर मिलाकर अरहर की दाल खरीदने से बजट पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा।
एक अन्य विक्रेता चन्द्रकांत के मुताबिक अरहर की दाल खरीदने वालों की संख्या में कमी तो आयी ही है, मात्रा पर भी असर साफ दिख रहा है।