ई-स्टांपिंग शुरू होने के चलते नहीं हो पा रही बिक्री, ढाई वर्ष से लाॅकर में पड़े हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। ई-स्टांपिंग की सुविधा शुरू होने के चलते जिला कोषागार में ढाई वर्ष से अधिक समय से 35 करोड़ रुपये के स्टांप डंप पड़े हैं। कोषागार कार्यालय में इतने बड़े पैमाने पर डंप पड़े स्टांप पेपर को खपाने के लिए शासन ने निर्देश के बाद तेजी आ गई है। सभी उपनिबंधक कार्यालय को निर्देश दिया गया कि अवशेष पड़े 10 से 25 हजार रुपये कीमत वाले स्टांप की जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग किया जाए।
कागज के प्रयोग को कम करने के लिए शुरू की गई ई-स्टापिंग की सुविधा ने जिले के कोषागार कार्यालय में पड़े 35 करोड़ रुपये से अधिक के स्टांप की बिक्री पर ग्रहण लगा दिया है। इसमें 10 हजार रुपये से अधिक कीमत के स्टांप शामिल हैं। इनका प्रयोग ज्यादातर भूमि बैनामे आदि में ही होता है। कोषागार कार्यालय के पास मौजूदा समय में 10 हजार रुपये के 6 हजार 699, 15 हजार रुपये के 6 हजार 73, 20 हजार के 2 हजार 261, 25 हजार के 6 हजार 49 स्टांप पेपर उपलब्ध हैं जो लंबे समय से लॉकर में ही पड़े हैं।
दरअसल ई-स्टांपिंग शुरू होने से स्टांप वेंडर को कोषागार कार्यालय का चक्कर लगाने से राहत मिल गई। उपनिबंधक कार्यालय में ही कम्प्यूटर के जरिए वे ऑनलाइन ई-स्टांप प्राप्त कर लेते हैं। बैनामा सहित अन्य स्टांप से जुड़े कार्य इससे आसानी से हो जाते हैं। बीते कुछ समय से ई-स्टांप पेपर पर ही लोगों का जोर है। इसके चलते ही कोषागार कार्यालय में 35 करोड़ से अधिक के स्टांप डंप पड़े हैं। ऐसे में अब शासन ने इसे खपाने के लिए सख्त निर्देश दिया है। इसके बाद कोषागार कार्यालय ने सहायक आयुक्त उपनिबंधक, अकबरपुर, टांडा, भीटी, जलालपुर व आलापुर उपनिबंधक को पत्र भेजा है।
कहा गया कि भूमि बैनामे में कोषागार कार्यालय में रखे गए स्टांप पेपर का प्रयोग कराया जाए। संबंधित स्टांप वेंडर या बैनामाधारक को कार्यालय भेजकर स्टांप की खरीदारी का सुझाव दिया जाए। वरिष्ठ कोषाधिकारी बृजलाल ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत करा दिया गया है।