अंबेडकरनगर। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना का हाल बदहाल है। स्पर्श प्रणाली में सुधार न होने से गर्भवतियों को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर पैसा खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। अगस्त माह से साॅफ्टवेयर अपडेट के चलते किसी को ई-वाउचर नहीं मिल पा रहा है। इसका खामियाजा करीब एक हजार गर्भवतियों को भुगतना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री मातृत्व योजना में
गर्भवतियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निशुल्क जांच कराई जाती है। इसके लिए स्थानीय सीएचसी से 425 रुपये का एक ई-वाउचर जनरेट किया जाता है। ई-वाउचर मिलने के बाद एक क्यूआर कोड आता है। इसको स्कैन करने पर निजी केंद्र के खाते में पैसा चला जाता हैं।
इसी योजना में पारदर्शिता बरतने के लिए स्पर्श प्रणाली से भुगतान प्रक्रिया को जोड़ दिया गया है। ऐसे में दो माह से भुगतान के लिए ई-वाउचर ही जनरेट नहीं हो पा रहा है।
महिलाओं को निजी क्लीनिक में महंगे दामों पर जांच करानी पड़ रही है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए परेशानी का सबब बन गई है।