सरकारी अस्पतालों में नसबंदी के नाम पर मनमानी का बड़ा खुलासा हुआ है। नवंबर में टांडा सीएचसी में नसबंदी कराने वाली एक महिला गर्भवती हो गई। उसके तीन बच्चे पहले से हैं। महिला व उसका पति एक दिन पहले अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट सामने आने के बाद से परेशान हैं।
दोनों ने सीएमओ से दोषी चिकित्सक व कर्मचारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई तय करने की मांग की है। सीएमओ ने समुचित जांच का भरोसा दिलाया है। निजी अस्पतालों में होने वाली मनमानी तो जब-तब सामने आती ही रहती है लेकिन सरकारी अस्पतालों में नसबंदी के नाम पर भी किस तरह खिलवाड़ किया जा रहा इसका एक बड़ा मामला सामने आया है।
परिवार नियोजन को सफल बनाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के जिन अधिकारियों व कर्मचारियों के जिम्मे है उन्हीं के बीच से ऐसी लापरवाही हुई है कि नसबंदी के बाद भी एक महिला गर्भवती हो गई। टांडा तहसील क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले धनंजय की पत्नी सुप्रिया (35) ने नवंबर 2016 में टांडा सीएचसी पर नसबंदी कराई थी।
दरअसल दंपती को पहले से ही तीन संतान हैं। इसके चलते उन्होंने तय किया था कि अब नसबंदी करा ली जाए। इसी निर्णय के बाद वे सब सरकारी अस्पताल को ही सुरक्षित मानते हुए टांडा सीएचसी पहुंचे थे। वहां चिकित्सक व टीम ने सुप्रिया की नसबंदी की। महिला अपने पति के साथ बाद में घर लौट आई।
इस बीच बीते दिनों महिला को फिर से गर्भवती हो जाने की आशंका हुई। उसने इस पर एक निजी चिकित्सालय जाकर अल्ट्रासाउंड कराया। वहां पता चला कि वह गर्भवती है। यह सुन सुप्रिया व उसका पति सन्न रह गया। उन दोनों को यह विश्वास ही नहीं हो रहा था कि ऐसा भी हो सकता है।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट लेकर हतप्रभ दंपती टांडा सरकारी अस्पताल पहुंच तो वहां से उन्हें बैरंग लौटा दिया गया। धनंजय ने बताया कि चिकित्सक व कर्मचारियों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि नसबंदी से पहले ही गर्भ रुका रहा होगा। इसलिए अल्ट्रासाउंड में यह रिपोर्ट आई है।
दंपती ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि नसबंदी से पहले ही गर्भ रुका था तो नसबंदी के समय जांच क्यों नहीं कराई। चिकित्सक व कर्मचारियों की लापरवाही के कारण ही उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। दंपती ने सीएमओ व अन्य अधिकारियों से शिकायत करते हुए कहा कि चिकित्सा टीम की लापरवाही के चलते ही नसबंदी के बाद ही गर्भ रुका है।
इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तय होनी चाहिए। सीएमओ डॉ मोहिबुल्लाह ने बताया कि मामला संज्ञान में है। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट अभी मेरे सामने नहीं आई है। रिपोर्ट देखने के बाद ही मामले में कुछ कहा जा सकेगा। प्रकरण में जांच तय कर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।