अंबेडकरनगर। भीषण गर्मी और उमस के बीच जिले में बिजली की मांग ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। तापमान बढ़ने के साथ कूलर, पंखे और एसी का उपयोग बढ़ने से बिजली की खपत 300 मेगावाट तक पहुंच गई है। मई माह में यह मांग करीब 260 मेगावाट थी। महज एक महीने में 40 मेगावाट की बढ़ोतरी ने बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है। बिजली घरों के ओवरलोड होने से बिजली कटौती से उपभोक्ता बेहाल हैं।
जिले की 20 लाख से अधिक आबादी को 42 उपकेंद्रों के माध्यम से बिजली आपूर्ति की जाती है। बढ़ते लोड के कारण कई उपकेंद्र क्षमता से अधिक भार झेल रहे हैं। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर बार-बार ट्रिप कर रहे हैं, जबकि लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती ने उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि बिजली संकट को लेकर लोग अब सड़कों पर उतरने लगे हैं।
अप्रैल में जिले में 83 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई थी, जो मई में बढ़कर 104 मिलियन यूनिट पहुंच गई। बढ़ती मांग का सबसे अधिक असर मरैला उपकेंद्र पर दिखाई दे रहा है, जहां से जुड़े शहरी क्षेत्रों समेत 100 से अधिक गांव अघोषित कटौती से जूझ रहे हैं। बैरमपुर बरवा, साउथ वेस्ट और कोटवा मोहम्मदपुर उपकेंद्रों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है।
सोमवार को अकबरपुर के वीआईपी फीडर से जुड़े कलेक्ट्रेट, पुलिस लाइन, रगड़गंज समेत एक दर्जन मोहल्लों में दिनभर रुक-रुक कर बिजली कटौती होती रही। इससे भीषण गर्मी में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस माह अब तक 121 ट्रांसफार्मर फुंके
बढ़ते लोड का असर ट्रांसफार्मरों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अप्रैल 2026 में 131 ट्रासंफार्मर ट्रांसफार्मर कार्यशाला पर मरम्मत के लिए आए थे। वहीं मई माह में इनकी संख्या बढ़कर 215 पहुंच गई है। जबकि अप्रैल 2025 में 110 और मई में 189 ट्रांसफार्मर ही फुंके थे। हालांकि जून 2025 में 320 ट्रांसफार्मर के सापेक्ष 20 जून तक केवल 121 ट्रासंफार्मर की फुंके हैं।
दूर कराई जा रहीं खामियां
बढ़ी हुई बिजली की मांग को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है। उपकेंद्रों और फीडरों पर अतिरिक्त लोड को संतुलित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। खराब होने वाले ट्रांसफार्मरों को तत्काल बदलने तथा तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए टीमों को सक्रिय रखा गया है।
रजनीश कुमार श्रीवास्तव, अधीक्षण अभियंता