बदतर विद्युत आपूर्ति का खामियाजा किस कदर कपड़ा उद्योग पर पड़ा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय पर ही लगभग 7500 पावरलूमों से 2500 पावरलूम की खटरपटर बंद हो गई है।
पावरलूम मालिकों का कहना है कि यदि सुचारु विद्युत आपूर्ति मिल रही होती, तो उन्हें यह दिन न देखना पड़ता। कहा कि रमजान के चलते विद्युत आपूर्ति कुछ सुधरी है, लेकिन सामान्य तौर पर बदहाली का ही सामना करना पड़ रहा है।
कपड़ा उद्योग के रूप में प्रसिद्ध अंबेडकरनगर में मौजूदा समय में पावरलूम मालिक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। वैसे तो टांडा को बुनकर नगरी कहा जाता है, जहां अब भी लगभग 35 हजार पावलूम संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा जलालपुर में लगभग 16 हजार, तो अकबरपुर में लगभग 5 हजार पावरलूम मौजूदा समय में संचालित हो रहे हैं।
पूर्व में पावरलूमों की संख्या इनसे कई गुना अधिक थी, लेकिन बदतर विद्युत आपूर्ति के चलते इनकी संख्या धीरे धीरे कम होती गई। सिंथेटिक धागों की बढ़ती कीमत व सुचारु बिजली न मिलने का ही नतीजा है कि मात्र जिला मुख्यालय पर ही साढ़े सात हजार से अधिक पावरलूमों में से मात्र लगभग 5 हजार पावरलूम कार्य कर रहे हैं, जबकि ढाई हजार से अधिक पावरलूमों की खटरपटर पूरी तरह ठप हो गई है।
शहजादपुर पण्डाटोला के गुलाम नूरानी ने बताया कि उन्होंने 5 पावरलूम किराए पर ले रखा है। इसका कुल 2500 रुपये किराया देना पड़ता है। बदतर विद्युत आपूर्ति के चलते अब इसका संचालन काफी मुश्किल हो गया। हालत यह है कि किराया व कर्मचारियों को तनख्वाह देने के बाद सिर्फ इतनी बचत होती है कि किसी प्रकार परिवार का पेट भर रहे हैं।
कहा कि यदि बिजली की ऐसी ही हालत रही, तो उन्हें इसे बंद करना पड़ेगा। शहजादपुर के मोहम्मद यूसुफ ने प्रदेश सरकार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि चुनाव के दौरान 20 से 22 घंटे की बिजली उपलब्ध कराने का वायदा किया गया था, लेकिन आमतौर पर बमुश्किल 12 घंटे की ही बिजली मिल पाती है।
उसमें लो वोल्टेज व बार बार की ट्रिपिंग होती रहती है। कहा कि उनके पास कुल 45 पावरलूम थे। बदतर विद्युत आपूर्ति के चलते सभी पावरलूम के संचालन में समस्या हो रही थी। इस पर उन्होंने 30 पावरलूम किराए पर दे दिए, जबकि 15 पावरलूम ठप पड़े हैं। शहजहांपुर के मोहम्मद इलियास ने बताया कि कभी वे 55 पावरलूम के मालिक थे, लेकिन मौजूदा समय में मात्र 10 पावरलूम ही शेष बचे हैं।
कारण यह कि समुचित बिजली न मिलने के चलते मजदूर ही नहीं आते। पूर्व में जहां एक दिन में प्रत्येक पावरलूम से 60 से 70 लुंगी बनती थी, वहीं अब बमुश्किल 8 से 10 लुंगी ही बन पा रही है। ऐसे में खर्च ही नहीं निकल पा रहा है। अकबरपुर के शौकत अंसारी, रईस अंसारी व नईम कादिरी ने कहा कि बगल स्थित आजमगढ़ जनपद को तो 20 से 22 घंटे की बिजली मुहैया कराई जा रही है>
अंबेडकरनगर को 12 घंटे की भी सुचारु बिजली मिलना मुश्किल हो गया है। तमाम पावरलूम मालिकों ने पावरलूम बेचकर दूसरे व्यवसाय में अपना हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। उधर अधिशाषी अभियंता विद्युत मुकेश बाबू ने बताया कि सुचारु आपूर्ति के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। रोस्टर के अनुरूप अधिकतम आपूर्ति उपभोक्ताओं तक पहुंचायी जा रही है।