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प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र के नाम पर वाहन स्वामियों से हो रही मनमानी वसूली

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अंबेडकनगर। जिला प्रशासन व परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते प्रदूषण जांच केन्द्रों द्वारा व्यापक मनमानी की जा रही है। वाहन स्वामियों से निर्धारित शुल्क से दोगुना अधिक वसूला जा रहा है। यह मनमानी इक्का-दुक्का प्रदूषण जांच सेंटर का नही, बल्कि उपसंभागीय परिवहन कार्यालय के बाहर खुले सभी केन्द्रों का है। परिवहन विभाग न तो इस तरफ ध्यान देता है, और न ही जिला प्रशासन। इसके चलते प्रतिदिन यहां वाहन स्वामियों का शोषण हो रहा है। वाहन स्वामियों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लिए जाने की मांग की है।
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बताते चलें कि प्रदूषण जांच के लिए सरकारी दर बाइक के लिए 30 रुपए, कार के लिए 40 रुपए निर्धारित है। परन्तु उपसंभागीय परिहवन कार्यालय के बाहर खुले इन जांच सेंटरों पर वाहन स्वामियों से मनमाना शुल्क वसूला जाता है। बाइक स्वामियों से जहां 100 से 150 रुपए वसूला जाता है, वहीं कार स्वामियों से तो 200 से 300 रुपए की मांग की जाती है। कार्रवाई से बचने के लिए वाहन स्वामी अपने वाहनों का प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र बनवाते हैं। वाहन स्वामियों का आरोप है कि कई बार इसकी शिकायत उपसंभागीय परिवहन कार्यालय के अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई इस तरफ ध्यान ही नहीं देता। इसके चलते आधा दर्जन से अधिक खुले जांच सेंटरों पर मनमानी शुल्क की वसूली की जा रही है।
बसखारी निवासी वाहन स्वामी अजय कुमार, अकबरपुर के विजय वर्मा, शहजादपुर के प्रमोद शुक्ल आदि का कहना है कि प्रदूषण प्रमाण पत्र के नाम पर जमकर शोषण हो रहा है। विभागीय अधिकारी भी इस मनमानी को लेकर उदासीन बने रहते हैं। इसके चलते इस तरह खुलेआम वाहन स्वामियों से निर्धारित शुल्क से दो गुना तीन गुना शुल्क वसूला जा रहा है। वाहन स्वामी अजय ने बताया कि उन्होंने इस बावत शिकायत जिलाधिकारी से भी की है। उधर आरआई विपिन कुमार का कहना है कि पंजीकृत प्रदूषण जांच केन्द्रों को निर्देश है कि वह निर्धारित शुल्क लें। यदि ऐसी कोई शिकायत सामने आयी तो तत्परता से कार्रवाई सुनिश्चित होगी। (संवाद)
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