फोटो 13, अंबेडकरनगर पुराने तहसील तिराहे के निकट पहुंचा भीम आर्मी अध्यक्ष का काफिला।
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जलालपुर/जहांगीरगंज। भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण ने समर्थकों के साथ गुरुवार को अंबेडकरनगर पहुंचकर जहांगीरगंज में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई बालिका से मुलाकात की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इसी मामले में हुए प्रदर्शन के दौरान जेल भेजे गए मंडल अध्यक्ष निखिल राव के घर पहुंचकर परिवारीजनों को सहयोग का भरोसा दिलाया। बाद में आजमगढ़ जाते समय न्यौरी के पास रोके जाने पर उन्होंने नेशनल हाइवे पर ही धरना शुरू कर दिया। अंबेडकरनगर के साथ ही आजमगढ़ प्रशासन से जुड़े पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने न्यौरी टोल प्लाजा पहुंचकर चंद्रशेखर को समझाने-बुझाने का प्रयास किया, लेकिन वे आजमगढ़ जाने की मांग पर डटे रहे।
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर उर्फ रावण गुरुवार पूर्वाह्न अंबेडकरनगर पहुंचे। यहां उन्हें जेल में बंद पार्टी नेता निखिल राव से मुलाकात करनी थी। निखिल बीते दिनों जहांगीरगंज में एक बालिका से हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस कार्रवाई के विरोध में हुए प्रदर्शन व तोड़फोड़ के आरोप में जेल में बंद है। उससे मिलने के लिए जेल पहुंचे चंद्रशेखर को जेल अधिकारियों ने शासन का वह आदेश दिखाकर लौटा दिया, जिसमें कोविड संक्रमण के चलते जेल में निरुद्ध बंदियों व कैदियों से मुलाकात पर रोक है। यहां से चंद्रशेखर ने जलालपुर तहसील स्थित निखिल के गांव शाहपुर फिरोजपुर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की। हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। यहां पहुंचे कार्यकर्ताओं से संगठन की मजबूती को लेकर चर्चा भी की। इसके बाद वे रामनगर पहुंचे, जहां से न्यौरी बाजार के लिए प्रस्थान कर गए। न्यौरी में ही उन्होंने जहांगीरगंज की गैंगरेप पीड़िता व उसके परिजनों से मुलाकात की। कहा कि संगठन पूरी तरह उनके साथ है।
चंद्रशेखर ने यहां से आजमगढ़ जाने के लिए आगे बढ़ने का प्रयास किया तो प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। दरअसल, वे आजमगढ़ में हुए सत्यमेव हत्याकांड मामले में गांव जाकर परिवारीजनों से मुलाकात करना चाहते थे। आजमगढ़ प्रशासन के अनुरोध पर उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इस पर वे अमड़ी टोल प्लाजा के पास मुख्य मार्ग पर ही समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। आलापुर थाना प्रभारी के बाद एसडीएम व सीओ भी पहुंचे। आजमगढ़ से भी पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी आ गए। हालात का हवाला देते हुए उनसे लौट जाने को कहा गया, लेकिन चंद्रशेखर समर्थकों के साथ धरने पर डटे रहे। समझाने-बुझाने का प्रयास जारी था।