टांडा (अंबेडकरनगर)। लोकसभा चुनाव में डुहिया बूथ पर बीएलओ की पिटाई के मामले ने तूल पकड़ लिया है। बीएलओ ने टांडा पुलिस द्वारा जांच में घटना को खारिज कर देने की चुनौती देते हुए सीएम को पत्र भेजकर शिकायत की है। इसमें कहा है कि पुलिस ने जिन दो ग्रामीणों के बयान का जिक्र कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी है उन दोनों ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर कहा है कि पुलिस ने उनसे कोई बयान नहीं लिया। उधर इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय टीम की जांच भी अधर में लटकी है जिससे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोकसभा चुनाव में मतदान के दिन बीएलओ की पिटाई के मामले में सख्त एक्शन के बजाय प्रशासन ढिलाई बरत रहा है। न तो बीएलओ पर झूठ बोलने का आरोप लगाकर कार्रवाई करने का साहस हो पा रहा है और न ही बूथ के अंदर बीएलओ की पिटाई करने वालों पर केस दर्ज किया जा रहा है। इसे लेकर प्रशासन पर तरह-तरह के गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब पिटाई का शिकार हुए बीएलओ मस्तराम पटेल ने सीएम को पत्र भेजकर कहा है कि मतदान के दिन चार लग्जरी वाहनों से आए लोगों ने बूथ के अंदर उसे मारा पीटा। सभी वरिष्ठ अधिकारियों को बताया गया कि लेकिन कार्रवाई में टालमटोल की जा रही है।
बीएलओ ने सीएम को भेजे पत्र में कहा कि जन सुनवाई पोर्टल पर उसने शिकायत की थी अब उसकी जांच में टांडा कोतवाली के निरीक्षक अनिरुद्ध सिंह ने अपनी रिपोर्ट में बूथ पर मारपीट होने को ही खारिज कर दिया। मुझे ड्यूटी के दौरान 250 मीटर दूर निजी कार से जाना दिखाते हुए वहां मारपीट बताई गई। बीएलओ ने कहा कि मनमाने ढंग से की गई जांच में दो ग्रामीणों का बयान पुलिस ने दर्शाया है। उन दोनों ग्रामीण धनीराम व शीतल प्रसाद ने शपथ पत्र देकर कहा है कि पुलिस ने उनसे कोई बयान नहीं लिया। शपथ पत्र में यह भी कहा कि पिटाई की घटना बूथ के अंदर भी हुई है। ऐसे में मनमाने ढंग से जांच करने वाले पुलिसकर्मी पर कार्रवाई की जाए।
इस बीच अब तक जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम को मारपीट के आरोपों से जुड़ी जांच पूरा करने का समय नहीं मिल पाया है, जबकि मतगणना तक समाप्त हो गई है। जांच का नेतृत्व कर रहे एसडीएम मोहनलाल गुप्त ने कहा कि अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है।