अंबेडकरनगर। हिंदू धर्म में विवाह को सात जन्मों का अटूट बंधन माना जाता है, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में छोटी-छोटी बातों पर होने वाले विवाद रिश्तों की डोर कमजोर कर रहे हैं। इन झगड़ों का एक बड़ा कारण मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल भी है।
परिवार परामर्श केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में कुल 1,389 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 524 मामलों में सफलतापूर्वक सुलह कराई गई। तुलनात्मक रूप से देखें तो वर्ष 2024 में 421 शिकायतें आईं, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या 409 रही। लगभग 30 प्रतिशत मामलों में पति की शराब पीने की आदत विवाद की मुख्य वजह बनी। वहीं करीब 20 प्रतिशत शिकायतों में मोबाइल और इंटरनेट का अत्यधिक इस्तेमाल झगड़े का कारण रहा। इसके अलावा प्रेम संबंध, ससुराल वालों से अलग रहने की जिद और आपसी सामंजस्य की कमी जैसे मुद्दे भी रिश्तों में दरार डाल रहे हैं।
पत्नी को चाहिए था मोबाइल का पासवर्ड
इब्राहिमपुर क्षेत्र के एक मामले में मोबाइल फोन पति-पत्नी के बीच विवाद की वजह बन गया, जिससे बात तलाक तक पहुंच गई। जब यह मामला परिवार परामर्श केंद्र पहुंचा, तो काउंसलिंग के दौरान पता चला कि पत्नी को अपने पति पर किसी अन्य महिला से बात करने का संदेह था। पत्नी की शर्त थी कि पति अपने मोबाइल का पासवर्ड उसे बता दे, ताकि उसका शक दूर हो सके। अंततः, केंद्र के हस्तक्षेप और आपसी समझौते के बाद पति-पत्नी साथ रहने को राजी हो गए और एक परिवार टूटने से बच गया।
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पांच साल बाद मिले तो, फफक पड़े दंपती
जलालपुर का एक खुशहाल परिवार उस समय बिखरने की कगार पर पहुंच गया, जब तीन बेटियों के जन्म के बाद कम दहेज को लेकर विवाद शुरू हो गया। ससुराल वालों के उत्पीड़न से परेशान होकर पत्नी पिछले पांच वर्षों से अपनी बेटियों के साथ अलग रह रही थी। विवाद बढ़ने पर मामला सुलह-समझौता केंद्र पहुंचा। काउंसलिंग के दौरान जब पति-पत्नी को आमने-सामने बिठाकर बात कराई गई, तो दोनों भावुक होकर रो पड़े। पुरानी कड़वाहट को भुलाकर दोनों ने अपनी बेटियों के भविष्य के लिए एक बार फिर साथ रहने का निर्णय लिया।
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वर्ष-मामले- सुलह
2022-213-115
2023-346-146
2024-421-143
2025-409-120
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आपसी सहमति से बनी बात
दंपती के बीच छोटी-छोटी बातें अब बड़े विवादों का कारण बन रही हैं। परिवार परामर्श केंद्र के प्रयासों से इस वर्ष अब तक 120 परिवारों को टूटने से बचाया गया और उनके बीच समझौता कराया गया। वहीं, जिन मामलों में आपसी सहमति नहीं बन सकी उनमें 289 मुकदमे दर्ज कराए गए हैं।
- हरेंद्र कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक