अंबेडकरनगर। जिले की पंचायतों को वाई-फाई सेवा युक्त बनाने की योजना तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो पायी है। इस दौरान करीब 60 लाख की धनराशि खर्च किए जाने के बाद भी पंचायत भवन व सचिवालय भारत नेटवर्क वाई-फाई चौपाल इंटरनेट सुविधा योजना से लैस नहीं हो पाए। अकबरपुर व बसखारी विकास खंड में तो हालत और भी खराब हैं। इन दोनों ब्लॉकों से जुड़ी किसी भी ग्राम पंचायत में योजना के तहत अभी तक कामकाज की शुरूआत तक नहीं हुई है। जिन सात विकास खंडों में इस योजना का संचालन शुरू भी हुआ, वहां कमजोर कनेक्टिविटी व धीमी स्पीड की समस्या से कामकाज नहीं हो पा रहा है। इसके चलते ही पंचायत भवनों व अन्य सरकारी संस्थानों को इंटरनेट सुविधा युक्त बनाने की योजना पूरी तरह धराशायी दिख रही है।
ग्राम पंचायतों में स्थित सरकारी संस्थान जैसे पंचायत भवन, परिषदीय विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, सरकार की ओर से नामित जनसेवा केंद्र, कोटे की दुकान समेत अन्य संस्थान को इंटरनेट सुविधा से लैस करने को लेकर शासन द्वारा वाई-फाई चौपाल इंटरनेट सुविधा योजना का संचालन साल 2019 में शुरू किया गया था। इसकी जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था कॉमन सर्विस सेंटर को सौंपी गई थी। करीब 90 लाख की लागत से जिले की सभी 902 ग्राम पंचायतों में यह कार्य कराया जाना था। योजना के तहत ग्राम पंचायतों में स्थित सरकारी संस्थानों को इंटरनेट सुविधा से लैस किए जाने का कार्य प्रारंभ हो गया, लेकिन कार्यदायी संस्था की ओर से इसे लेकर बहुत अधिक गंभीरता नहीं दिखाई गई। इसे गंभीरता से लेते हुए बाद में शासन ने इंटरनेट सुविधा कार्य कॉमन सर्विस सेंटर से वापस लेकर बीएसएनएल को सौंप दिया।
जिले में योजना की बदहाली इसी से दिखती है कि तीन साल बाद भी अकबरपुर और बसखारी विकास खंड में कार्य योजना के तहत कोई कार्य शुरू ही नहीं हो सका। सात अन्य विकास खंडों में जो काम हुआ भी वह भी अधूरा है। कहीं पंचायत भवन में इंटरनेट सुविधा दी गयी तो आंगनबाड़ी केंद्र वंचित हैं, कहीं जनसेवा केंद्र पर इंटरनेट है तो अन्य सरकारी संस्थान इस सुविधा से वंचित हैं। इसके चलते ही पंचायत भवनों व अन्य सरकारी संस्थानों को इंटरनेट सुविधा युक्त बनाने की योजना पूरी तरह धराशायी दिख रही है।
वैकल्पिक व्यवस्था से चल रहा काम
योजना के तहत वाई-फाई सुविधा अपग्रेड न हो पाने से पंचायत भवन, राशन की दुकान, आंगनबाड़ी केंद्र समेत अन्य सरकारी संस्थानों में विभिन्न प्रकार का फीडिंग कार्य वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कराना पड़ रहा है। राशन वितरण के दौरान भी ई-पॉस मशीन के संचालन के लिए कोटेदार को निजी स्तर पर वाई-फाई सुविधा जुटानी पड़ती है। कर्मचारियों का कहना है कि कुछ पंचायत भवन में वाई-फाई की सुविधा तो है, लेकिन स्पीड इतनी धीमी होती है कि इसका लाभ नहीं मिल पाता है।
जिम्मेदारों को दिए गए निर्देश
भारत नेटवर्क योजना के तहत कुछ केंद्रों पर संचालन तो प्रारंभ हुआ है। ज्यादातर केंद्रों पर वाई-फाई के लिए केबल लगा दी गई है। योजना का संचालन सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए बीएसएनएल के जिम्मेदारों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
-अवनीश कुमार, डीपीआरओ